Tuesday, 10 March, 2009

आया भरतार लगाया ना रंग

लगा गुलाल
गया मलाल,
मन में उमड़ा
प्रीत का ज्वार
दोनों मिले
बाहें पसार।
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आया भरतार
लगाया ना रंग
प्यासी गौरी
लग गई अंग।

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