Wednesday, 29 October, 2008

पत्थर दिल से प्यार किया

पत्थर दिल से प्यार किया
अपने को बरबाद किया,
कर ना सका आबाद किसी को
ख़ुद को ही बरबाद किया।
जब भी देखी उसकी सूरत
आंखों को हमने और खोल दिया
प्यार किया है हमने तुमसे
आंखों से उसको बोल दिया।
कुछ ना फ़िर वो कह पाए
बस पत्थर से सीसा तोड़ दिया।
वह पिघल सका ना प्यार आग में
हमने ख़ुद को जलाकर राख किया
खुशियाँ जल गईं उसमे मेरी
ग़मों का हमने साथ किया
गम ना देना उसको कभी तुम
हमने जी से प्यार किया।

--गोविन्द गोयल

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