Wednesday, 19 May, 2010

तुम क्या हो


मैं नहीं जानता
तुम क्या हो और
क्या बनना चाहते हो,
लेकिन तुम से
इतना अवश्य कहूँगा
तुम जो हो वही रहो
वो बनने की कोशिश
मत करो
जो तुम नहीं हो,
कहीं ऐसा ना हो कि
भविष्य का कोई झोंका
तुम्हारे वर्तमान अस्तित्व
कि मिटा दे,और
बाद में तुम
अपने अतीत को
याद करके अपनी
करनी पर पछताते रहो।

1 comment:

Rekhaa Prahalad said...

खूब कही!