Friday 21 May 2010

कहानी इस बार जरा लम्बी है

माननीय आई पी एस ........ जी नमस्कार। आप ज्ञानवान और बुद्धिमान हैं तभी तो आई पी एस हैं। छोटी उम्र में बड़ी सफलता मिलने पर थोड़ा बहुत अहंकार तो आ ही जाता है। अहंकार आते ही विवेक इन्सान के बस में नहीं रहता। हो सकता है यहाँ लिखे गए शब्द आपके व्यक्तित्व के अनुरूप ना लगे लेकिन क्या करें आपकी और मेरी मुलाकात ही ऐसे समय हुई जब आपके साथ आपका विवेक नजर नहीं आया। जिस समय मैने आपसे मिलने की अभिलाषा की उस समय आपने कुछ समय पहले गिरफ्तार किये व्यक्ति को अपने सामने अलफ नंगा खड़ा कर रखा था। मुझे किसी ने बताया नहीं,थाने में खुद देखा। आपने और आपके शागिर्द एक पुलिस वाले ने ऑफिस का दरवाजा बंद कर पर्दा लगा ये पक्का इंतजाम किया था कि आपके अलावा उसे कोई और ना देखे। लेकिन ऑफिस में चलने वाले पंखे के कारण सारा कबाड़ा हो गया। मैने भी उसको देख लिया। पता नहीं कानून की कौनसी धारा के तहत आपने उसको नंगा किया? साहब जी, आपने यहाँ तक आते आते बहुत सा ज्ञान अर्जित किया है,बहुत मोटी-मोटी हिंदी अंग्रेजी की किताबें पढ़ी हैं। क्या किसी किताब में ये ज़िक्र है कि अंग्रेजों के राज में किसी अंग्रेज अफसर ने किसी हिन्दुस्तानी को इस प्रकार से नंगा किया हो। कहीं तालिबान का राज भी रहा है,उनके बारे में भी ऐसा पढ़ने या सुनने में नहीं आया। लादेन का भी सिक्का चलता है मगर ये खबर तो नहीं आई कि वह अपने मुलजिमो को अपने सामने नंगा कर देता है। शायर रवीन्द्र कृष्ण मजबूर कहते हैं कि हट के दिया,हट के किया याद रहता है। इसलिए आँखों में अब भी वह बसा हुआ है जो ४५ घंटे पहले देखा था। क्योंकि वह हट के था। मुलजिम को अपने सामने नंगा करने का आपका तर्क भी हट के है। तब आपने कहा था कि ऐसा करने से मुलजिम दुबारा अपराध करने से डरता है। वह तो थाने में महिला सिपाही भी थी इस कारण से उसको घुमाया नहीं। साहब जी, आपको याद होगा, आपने कहा था कि आप कभी कभी नंगे मुलजिम की अपने मोबाइल फोन से तस्वीर भी ले लेते हैं। ताकि उसको यह कहकर डराया जा सके कि अगर दुबारा अपराध किया तो फोटो घर वालों को दिखा देंगे। मुझे याद है इसके बाद आपने ये कहा, किन्तु अभी तक ऐसा किया नहीं है। मैं फोटो डीलिट कर देता हूँ।
साहब जी, चूँकि ज्ञान, बुद्धि और संस्कार में हम आपका मुकाबला नहीं कर सकते इस वजह से ये तो नहीं जानते की आपने जो किया वह सही है या गलत हाँ इतना जरुर पता है कि किसी को किसी के सामने नंगा कर देने से बड़ी जलालत उस आदमी के लिए तो हो ही नहीं सकती। भारतीय संस्कृति में तो नंगा नहाना भी पाप है,किसी के सामने नंगा होना या किसी को अपने सामने नंगा होने के लिए मजबूर करना तो हट के है। आज आप आई पी एस हैं, वक्त आपके साथ है। जो करोगे सब कानूनन सही कहलायेगा। कल का क्या पता । वक्त किसी दूसरे के पास जा सकता है। मुलजिमो को दुबारा अपराध करने से रोकने के लिए बहुत कुछ है। आपकी फाइल मजबूत हो तो अपराधी सजा से बच ही नहीं सकता। किन्तु आपका तो अपराध समाप्त करवाने का नजरिया ही हट के है। ऐसे में किसी और कानून की तो जरुरत ही नहीं। आज आप उस पोजीशन में हैं जहाँ आप पर कोई पाबन्दी नहीं। कानून! कानून तो वही है जो आप कहें और जो आप करें। किस की मजाल जो आपके हुकम की पालना में जय हिंद ना कहे। मजबूर के ही शब्दों में "कहने को तो सब कुछ कह डाला,कुछ कहते हैं कुछ कह नहीं सकते।" आप मुझे अपना तो मान ही नहीं सकते। इसलिए आपका गोविंद गोयल लिखना तो ठीक नहीं।
चुनांचे केवल -गोविंद गोयल
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यह श्रीगंगानगर में नियुक्त एक आई पी एस को समर्पित है।