Thursday 20 November 2008

हौंसला देंगी ये चिठ्ठियाँ

फाड़ मत इनको कि जब अपनों से दिल घबराएगा
हौंसला देंगी ये चिठ्ठियाँ रहने भी दे।
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तेरा दीवाना गुजरा है जिधर से
खुलीं हैं खिड़कियाँ सारे घरों की।
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सौ बार बिगाड़ी हैं बनाकर तेरी तस्वीरें
रंग उसमे मोहब्बत के उभर के नहीं आए।
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लिख रखा है आंखों में मिले वक्त तो पढ़ना
वो लफ्ज जो तहरीर से बहार नहीं आए।
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घर से निकला तो सोचा कि किधर जाओगे
हर तरफ़ तेज हवाएं हैं बिखर जाओगे।
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सब पंक्तियाँ संकलित हैं।

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