Tuesday 18 November 2008

तन्हा ना अपने आप को पाइए

दुआ करो कि ये पौधा सदा हरा ही लगे
उदासियों में भी चेहरा खिला खिला लगे।
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तन्हा ना अपने आप को पाइए जनाब
मेरी गजल को साथ लिए जाइये जनाब।
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मैं इस उम्मीद पे डूबा कि तू बचा लेगा
अब इसके बाद मेरा इम्तिहान क्या लेगा।
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मैं बुझ गया तो हमेशा को बुझ ही जाऊंगा
कोई चराग नहीं हूँ जो फ़िर जला लेगा।
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मैं उसका हो नहीं सकता बता ना देना उसे
लकीरें हाथ की अपनी वो सब जला लेगा।
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मेरे बारे में हवाओं से कब पूछेगा
खाक जब खाक में मिल जायेगी तब पूछेगा।
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घर बसाने में ये खतरा है कि घर का मालिक
रात को देर से आने का सबब पूछेगा।
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लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में।
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ये सब लाइन संकलित की हुई हैं।

1 comment:

jayaka said...

Sankalan bahut achchha laga!... shikshaprad rachana ke liye dhanyawad!