Monday, 25 July 2011

समाज को पल्ले बांधने की तैयारी



श्रीगंगानगरसवा दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को निगाह में रख अग्रवाल समाज को सभापति जगदीश जांदू का पल्लू थमाने की तैयारी है। इसके लिए ताना बाना बुन लिया गया है। अग्रवाल सेवा समिति के अध्यक्ष नत्थू राम सिंगला के हाथ में इस महत्वपूर्ण काम की कमान है जो पार्षद के नाते जांदू के करीबी हैं। समिति के छात्रवृति कार्यक्रम में गए समाज के जाने माने व्यक्तियों ने यह सब अपनी आँखों से देखा। दिल से महसूस किया। यहां जगदीश जांदू एंड कंपनी प्रमुखता से मौजूद थी। खुद जगदीश जांदू मंच पर थे। उनके साथ थे आयुक्त हितेश कुमार । अनेक पार्षद अग्रिम पंक्ति में स्थान पाए हुए थे। किसी समाज के कार्यक्रम में किसी गैर अग्रवाल राजनेता की कंपनी की उपस्थिति नई थी। अगर जांदू एंड कंपनी को जनप्रतिनिधि के नाते बुलाया गया तो फिर विधायक राधेश्याम गंगानगर को बुलाया जाना और भी बेहतर होता। आयुक्त के स्थान पर या उनके साथ जिला कलेक्टर की मौजूदगी समारोह को और भी भव्य बनाती। सत्ता के निकट समाज को ले जाना है तो फिर गौड़ साहब कौन सा दूर थे। नगर में रहने अन्य समाज से तालमेल बढ़ाना की इच्छा थी तो फिर अरोड़ा,ब्राह्मण,राजपूत,सिख,नायक,मेघवाल .......... समाज के अध्यक्षों को बुला सम्मानजनक स्थान पर बिठाया जाता। लेकिन ऐसा तो दिल में था ही नहीं। ये नेता जांदू के विरोधी हैं। जबकि श्री सिंगला जांदू के पाले में। जब वे उनके साथ है तो उनका पहला कर्तव्य है अग्रवाल समाज को जांदू का पल्लू पकड़वाना। समिति के मुख्य संरक्षक बी डी अग्रवाल की भी इसमें मूक सहमति दिखी। वरना जांदू एंड कंपनी को बुलाना असंभव था। जांदू की एक मात्र ख़्वाहिश विधायक बनना है। अग्रवाल समाज श्री सिंगला के पीछे लग अगर जांदू का पल्लू पकड़ लेता है तो उसे और क्या चाहिए। यह उनकी लीडरशिप में अग्रवाल समाज का नया इतिहास लिखे जाने का संकेत है। संकेत है नई चेतना का। क्योंकि दूसरे समाज के राजनेता,उसके समर्थक जनप्रतिनिधियों को बुलाने की पहल उनकी ही है। यह उनके खुले विचारों का कमाल है। देखना ये कि अग्रवाल समाज इस बात को समझता है या नहीं। फिलहाल वे जांदू को यह संदेश देने में सफल हो गए कि मेरे नेतृत्व में अग्रवाल समाज उनके साथ है। अग्रवाल समाज अपनी शोभा यात्रा में श्री सिंगला के नेतृत्व में यह नारा जांदू तुम आगे बढ़ो,अग्रवाल तुम्हारे साथ हैं लगाते दिखे तो अचरज नहीं होना चाहिए। मजबूर कहते हैंजो झूठ पे खुल्ला वार करे,जो सच पे जां निसार करे,जो साफ कहे जो साफ रहे, बेखौफ हो हक की बात कहे। खुदगर्ज तेरी दुनिया वाले इसको बगावत कहते हैं।

Tuesday, 19 July 2011

हम सब जानते हैं कि कुछ कोस पर भाषा,बोली बदल जाती है और अखबारों की खबरें भी । श्रीगंगानगर के अखबार में हम जो खबर पढ़ते हैं वह किसी कस्बे,शहर में रहने वाला नहीं पढ़ पाता। अखबार भले ही एक हो मगर खबर एक समान नहीं होती। ऐसे में श्रीगंगानगर से दूर रहने वाले ये नहीं जान पाते कि श्रीगंगानगर क्षेत्र के आर्थिक,सामाजिक,राजनीतिक,धार्मिक,शिक्षा,चिकित्सा,कला,साहित्य,…………. पटल पर क्या हो रहा है। अब सब वही पढ़ेंगे जो श्रीगंगानगर मे रहने वाले। इसके लिए हम शुरू कर रहें हैं ऑनलाइन अखबार www.newsbox4u.com । आज जमाना इंटरनेट का है। धरती का कोई कोना ऐसा नहीं जहां इंटरनेट की पहुँच ना हो। जब इंटरनेट है तो www.newsbox4u.com भी होगा।

यह तभी संभव होगा जब आप इस वेबसाइट को अपना जान हमें अपने इलाके की हर खबर से परिचित करवाएंगे। यह आप ही कर सकते हैं क्योंकि आप अपने इलाके की नब्ज को जानते हैं। उसका नजरिया आपकी नजर में है। आपकी खबर कुछ मिनट में दुनिया की नजर में होगी। उम्मीद है आपकी मार्फत दुनिया आपके इलाके को आपकी नजर से पढ़ पाएगी।

आपका साथी

गोविंद गोयल ,संपादक

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Sunday, 17 July 2011

मंत्री के लिए छोटे अधिकारी


राजस्थान के मंत्री गुरमीत सिंह कुनर ने किसानों को पूरा सिंचाई पानी दिलाने के लिए पंजाब में राजस्थान की नहरों का दौरा किया। पंजाब राजस्थान के हिस्से का पानी कितना कहाँ देता है इसकी जानकारी ली। एक मंत्री को यह सब पंजाब के एक एक्स ए एन ने बताया। राजस्थान के मंत्री के लिए पंजाब का कोई बड़ा अधिकारी नहीं पहुंचा। जबकि गुरमीत सिंह कुनर राजस्थान के जल संसाधन मंत्री भी है। ऐसा लगता है की पंजाब ने राजस्थान के मंत्री को कोई अहमियत नहीं दी। पंजाब की धरती पर राजस्थान की नहरों में जितना पानी बहता है उसमें सरे आम चोरी होती है। राजस्थान सरकार कुछ नहीं कर पाती।हरि के पतन पर एक एक्स ए एन था । फिरोजपुर में पंजाब ने अपने एस ई को मंत्री को जानकारी देने के लिए भेजा।

Wednesday, 13 July 2011

पुलिस अधिकारी के डर से मांगी मौत की अनुमति


एक आम आदमी किसी पुलिस अधिकारी के खौफ से मरने की अनुमति मांगे तो बात कुछ हजम हो सकती है। यहाँ तो पुलिस वाला पुलिस अधिकारी के डर से आत्महत्या की अनुमति मांग रहा है। कोतवाली थाना में एक ए एस आई है धर्मपाल। उसका आरोप है कि उसे कोतवाल नारायण सिंह लगातार प्रताड़ित कर रहा है। वह इतना तंग आ गया कि मरना चाहता है। इस बारे में उसने पुलिस अधिकारियों से लेकर राष्ट्रपति तक पत्र लिखा है। पुलिस में इस मामले से हड़कंप मचा हुआ है।

Tuesday, 5 July 2011

कुनर गुजरात की मंडी में



अहमदाबादराजस्थान के कृषि विपणन मंत्री श्री गुरमीत सिंह कुनर ने आज यहाँ से 150 किलोमीटर दूर जीरा और ईसबगोल के लिए विख्यात उंझा मंडी का दौरा किया। उनके साथ गुजरात मार्केटिंग बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों का एक दल था। श्री कुनर ने मंडी की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया। मंडी के चेयरमेन, अधिकारियों के साथ बैठक कर विचार विमर्श किया। उन्होने यहाँ के व्यापारियों,किसानों,जनप्रतिनिधियों से मुलाक़ात की। इसके बाद श्री श्री कुनर आलू की जानी मानी मंडी डीसा पहुंचे। यहां भी श्री कुनर ने मंडी का अवलोकन कर यहां विपणन संबंधी सुविधाओं की जानकारी ली। आलू का प्रोसेसिंग प्लांट देखा। श्री कुनर ने दोनों मंडियों मे बोली की प्रक्रिया भी देखी।श्री कुनर ने अहमदाबाद में आधुनिक कोल्ड स्टोरेज का निरीक्षण कर कृषि उत्पादों के आधुनिक भंडारण तरीकों की जानकारी ली। श्री कुनर अपने अधिकारियों के साथ कल रात अहमदाबाद पहुंचे थे।

बुधवार को श्री कुनर का नासिक की मंडी का अवलोकन करने का कार्यक्रम है। नासिक देश भर प्याज की मंडी के रूप में अपनी पहचान रखता है।

श्री कुनर ने बताया कि राजस्थान मे जितना भी जीरा होता है उसका सत्तर से अस्सी प्रतिशत उंझा मंडी में बिक्री हेतु लाया जाता है। श्री कुनर के अनुसार उनके दौरे का मकसद वह जानकारी लेना है जिसके कारण राजस्थान के किसान इतनी दूर अपनी फसल लेकर आते हैं। ताकि उनको वैसी ही सुविधाएं राजस्थान की मंडियों में उपलब्ध करवाई जा सके। श्री कुनर ने बताया कि किसानों को मंडियों मे सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी जो देश की अन्य मंडियों में है। जिससे किसानों को अपने घर से दूर ना जाना पड़े और फसल का बढ़िया दाम घर के आस पास स्थित मंडी में मिल सके।

Saturday, 2 July 2011

चालू है इन्टरनेट

श्रीगंगानगर—आप इंटरनेट के रसिया हो! आपके पास शानदार,जानदार और दमदार लेपटोप है! तो बस आपको किसी कंपनी से इंटरनेट सुविधा लेने की कोई जरूरत नहीं है। बिना कोई दाम के आप इंटरनेट घंटों यूज कर सकते हो। यह कोई मज़ाक नहीं। ना ही किसी कंपनी का कोई नया फंडा है। यह तो जुगाड़ है जो आपके काम आ सकता है। बस इसके लिए आपको उस स्थान के आस पास जाना होगा जहां ब्रॉडबैंड से इंटरनेट चलाया जाता है। जहां इंटरनेट चल रहा हो ,उसके कुछ फुट दूर आप भी अपने लेपटोप पर इंटरनेट यूज करने का आनंद ले सकते हो। श्रीगंगानगर के एक स्थान पर नहीं अनेक स्थान पर इस प्रकार से किसी के ब्रॉडबैंड को कोई और यूज कर रहा है। कोई भी असामाजिक तत्व या कोई शरारती इस प्रकार से किसी को आर्थिक चपत लगा सकता है। क्योंकि जितना वह व्यक्ति उपलोड,डाऊनलोड करेगा उसका बिल उसके खाते मे आएगा जिसका वह कनैक्शन है। चूंकि उसकी जेब से कुछ नहीं लगना इसलिए वह इस्तेमाल भी बेदर्दी से करेगा। बीएसएनएल के अधिकृत सूत्र इस बात को स्वीकार करते हैं कि ऐसा संभव है। उनका कहना है कि जिन यूजर के यहाँ वाई फाई मॉडम होता है उसके आस पास कोई दूसरा भी इंटरनेट यूज कर सकता है। वाई फाई मॉडम की रेंज कई फुट तक होती है। इसलिए कई लेपटोप पर एक साथ एक ब्रॉडबैंड से इंटरनेट चलाया जा सकता है। यह मॉडम इस लिए होता है ताकि एक ही बिल्डिंग में रहने वाले एक कनैक्शन से अलग अलग बैठ कर अपना काम कर सकें। उनको कनैक्शन मे अधिक राशि ना खर्च करनी पड़े। सूत्र ने कहा कि ब्रॉडबैंड कनैक्शन का दुरुपयोग रोकने के लिए उसका पासवर्ड किसी को नहीं बताना चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि कोई आस पास ऐसा व्यक्ति तो नहीं जो आपके इंटरनेट चलाने के समय को जानता हो। संभव है वह उस समय अपने लेपटोप पर इंटरनेट चलाये जब आपका इंटरनेट ऑन हो। सूत्र ने बताया कि इंटरनेट का दुरुपयोग ना हो इसके लिए सावधानी जरूरी है।

Saturday, 25 June 2011

एक रोटी और



श्रीगंगानगर—पति भोजन कर रहा है। पत्नी उसके पास बैठी हाथ से पंखा कर रही है। जो चाहिए खुद परोसती है मनुहार के साथ। “एक रोटी तो और लेनी पड़ेगी। आपको मेरी कसम।“ पति प्यार भरी इस कसम को कैसे व्यर्थ जाने देता। रोटी खाई। तारीफ की। काम पर चला गया। यह बात आज की नहीं। उस जमाने की है जब बिजली के पंखे तो क्या बिजली ही नहीं हुआ करती थी। संयुक्त परिवार का जमाना था। रसोई बनाता चाहे कोई किन्तु खिलाने का काम माँ का और शादी के बाद पत्नी का था। पति रोटी आज भी खा रहा है। मगर पत्नी घर के किसी दूसरे काम में व्यस्त है। रोटी,पानी,सब्जी,सलाद जो कुछ भी था ,लाकर रखा और काम में लग गई। पति ने कुछ मांगा। पत्नी ने वहीं से जवाब दिया... बस करो। और मत खाओ। खराब करेगी। “तुमको मेरी कसम। आधी रोटी तो देनी ही पड़ेगी। पति ने कहा।“ “ नहीं मानते तो मत मानो। कुछ हो गया तो मुझे मत कहना। यह कहती हुई वह आधी रोटी थाली में डालकर फिर काम में लग गई।“ पति कब पेट में रोटी डालकर चला गया उसे पता ही नहीं लगा । तब और आज में यही फर्क है। रिश्ता नहीं बदला बस उसमें से मिठास गायब हो गई। जो रिश्ता थोड़ी सी केयर से मीठा होकर और मजबूत हो जाता था अब वह औपचारिक होकर रह गया। यह किसी किताब में नहीं पढ़ा। सब देखा और सुना है। रिश्तों में खिंचाव की यह एक मात्र नहीं तो बड़ी वजह तो है ही। एक दंपती सुबह की चाय एक साथ पीते हैं। दूसरा अलग अलग। एक पत्नी अपने पति को पास बैठकर नाश्ता करवाती है। दूसरी रख कर चली जाती है। कोई भी बता सकता है कि पहले वाले दंपती के यहाँ ना केवल माहौल खुशनुमा होगा बल्कि उनके रिश्तों में मिठास और महक होगी जो घर को घर बनाए रखने में महत्वपूर्ण पार्ट निभाती है। क्योंकि सब जानते हैं कि घर ईंट,सीमेंट,मार्बल,बढ़िया फर्नीचर से नहीं आपसी प्यार से बनते हैं। आधुनिक सोच और दिखावे की ज़िंदगी ने यह सब पीछे कर दिया है। यही कारण है कि घरों में जितना बिखराव वर्तमान में है उतना उस समय नहीं था जब सब लोग एक साथ रहते थे। घर छोटे थे। ना तो इतनी कमाई थी ना सुविधा। हाँ तब दिल बड़े हुआ करते थे। आज घर बड़े होने लगे हैं। बड़े घरों में सुविधा तो बढ़ती जा रही है मगर एक दूसरे के प्रति प्यार कम हो रहा है। बस, निभाना है। यह सोच घर कर गई है। पहले सात जन्म का बंधन मानते थे। अब एक जन्म काटना लगता है।

कुंवर बेचैन कहते हैं—रहते हमारे पास तो ये टूटते जरूर, अच्छा किया जो आपने सपने चुरा लिए। एक एसएमएस...अच्छा दोस्त और सच्चा प्यार सौ बार भी मनाना पड़े तो मनाना चाहिए। क्योंकि कीमती मोतियों की माला भी तो टूटने पर बार बार पिरोते हैं।


Sunday, 12 June 2011

कलेक्टर बेटी के रूप में

श्रीगंगानगर--कलेक्टर के रुतबे का प्रभाव जनप्रतिनिधियों पर नहीं पड़ा तो मुग्धा सिन्हा बेटी बन कर सामने आ खड़ी हुई। भावनात्मक अपील के पीछे अपनी सफाई दी। सभी को मीठी चाय का ऑफर दिया। ताकि खिचे,खिजे रिश्तों में मिठास इस प्रकार से घुल जाए ताकि कड़वाहट का नाम निशान भी ना रहे। हुआ भी ऐसा ही। 30 मई को जिला परिषद की बैठक में जो रिश्ते बिगड़े थे,वह 10 जून को वहीं फिर बन गए। शुरू में तो जनप्रतिनिधियों ने मुग्धा सिन्हा को खूब खरी खरी कही। उनपर कर्मचारियों को जप्रतिनिधियों के खिलाफ भड़काने के आरोप भी लगे। बीच में अजयपाल ज्याणी ने कलेक्टर मुग्धा सिन्हा को कुछ कहा। मुग्धा सिन्हा ने ओंठ पर अंगुली रख कर उनको चुप रहने को कहा। काफी देर तक वातावरण में तनाव रहा। कलेक्टर मुग्धा सिन्हा को बोलना ही पड़ा। मुग्धा सिन्हा बोलीं, मैं बोलुंगी तो बोलेगे कि बोलती है। मुझे नहीं मालूम था कि इतने लोग मुझे सुनने को .......... । हम लोग नहीं जनप्रतिनिधि हैं। विधायक पवन दुग्गल बीच में बोले। मुग्धा सिन्हा ने बोलना जारी रखा। शब्दों पर मत जाइए। भावना को समझें। मैंने किसी कर्मचारी को कुछ नहीं कहा। मुझे यहाँ बेटी कहा गया है। भगवान कृष्ण ने द्रोपदी की लाज बचाई। यह वो जिला है जहां कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ वातावरण बना हुआ है। इसलिए मुझे उम्मीद है कि मुझे भी यहाँ सहयोग मिलेगा। भावपूर्ण शब्दों में अपील की आड़ में सफाई देते समय मुग्धा सिन्हा की आँखों में आँसू ने दिखें हों मगर ये तो महसूस हो ही रहा था कि उनका गला भरा हुआ है। कोई महिला भरे सदन में बेटी के रूप में सहयोग मांगे तो कौन ऐसा होगा जो सहयोग नहीं देगा। कलेक्टर मुग्धा सिन्हा के मीठी चाय के आग्रह के साथ ही तनाव समाप्त हो गया। इसके बाद श्री ज्याणी ने अपने विभाग के सवालों का जवाब देते हुए कहा, सारिका ने मुझे बताया था। सारिका चौधरी ने खड़े होकर ऐतराज जताया। इस पर ज्याणी ने कहा, ठीक है आइंदा फॉर्मल रिश्ते रहेंगे। इंफोरमल नहीं। हर किसी को किसी ना किसी रिश्ते से बांधने वाले विधायक राधेश्याम गंगानगर ने श्री ज्याणी को पोता कहा। सदन में इसी प्रकार से रिश्तों की डोर एक दूसरे को बांधती रही। इस प्रकार के सम्बोधन के समय कृषि मंत्री गुरमीत सिंह कुनर ने चुटकी ली। वे बोले, सदन में माँ, बहिन,बेटी, बेटा, पोता...कोई नहीं होता। एक दूसरे को सम्बोधन नाम और पद से किया जाता है। शारदा कृष्ण कहते हैं-अपनों बीच लूटी है लाज,तुम बिन किसे पुकारूँ आज। झूठे को सच मनवाता है, नगर अंधेरा चौपट राज। अब एक एसएमएसअच्छा दोस्त और सच्चा प्यार 100 बार भी रूठ जाए तो हर बार उसे मना लेना चाहिए। क्योंकि कीमती मोतियों की माला कितनी बार भी टूटे उसे हर बार पिरोया जाता है।

Monday, 6 June 2011

जूता फिर हुआ महत्वपूर्ण

काँग्रेस मुख्यालय में हुई प्रेस कोंफ्रेंस में एक कथित पत्रकार द्वारा जनार्दन द्विवेदी को जूता दिखाने की घटना की निंदा की जानी चाहिए। वास्तव में यह पत्रकार नहीं है। हैरानी उस बात की है कि वह आदमी एक पत्रकार के रूप में वहां आया कैसे? ये अचरज नहीं तो और क्या है कि कोई भी इंसान पत्रकार बनकर प्रेस कोंफ्रेंस में बैठ गया। किसी ने पूछा तक नहीं। देश को चलाने वाली पार्टी की पीसी में ऐसी गफलत! इसने तो केवल जूता ही दिखाया। ऐसे हालत में तो कोई कुछ भी कर सकता है। इसका मतलब तो ये हुआ कि सुरक्षा नाम की कोई बात ही नहीं।चलो कुछ भी हुआ। इस घटना से जनार्दन द्विवेदी को बहुत नुकसान हुआ। उनकी बात तो पीछे रह गई। सुनील कुमार और उसका जूता छा गया। इस बात की तो जांच काँग्रेस को खुद भी करनी चाहिए कि कोई आदमी पत्रकार बन कर कैसे वहां आ गया।गत तीन दिनों से इस देश में वह हो रहा है जो नहीं होना चाहिएइसके बावजूद वह नहीं बोल रहा जिनको बोलना चाहिएआप सब जानते हैं हम प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बात कर रहे हैंजो बोल रहे हैं वे ऐसा बोल रहे है कि ना ही कुछ कहें तो बेहतरजब पूरा देश किसी बात का विरोध कर रहा हो तो देश को चलाने वाले का यह फर्ज है जनता से संवाद करेपरन्तु पता नहीं प्रधानमंत्री किस कार्य में व्यस्त हैं? ये तो हो नहीं सकता कि उनको किसी बात का पता ना होइसके बावजूद उनकी चुप्पी से जनता हैरान हैदेश में कुछ भी होता रहे ,मुखिया को कोई चिंता नहींउसका कोई कर्तव्य नहींउसकी कोई जवाबदेही जनता के प्रति नहींना जाने ये किस मिजाज के लोग हैं जो इस प्रकार से तमाम घटनाओं से अपने आप को दूर रखे हुए है

Sunday, 5 June 2011

बाबा योग जानते थे राजनीति नहीं

श्रीगंगानगरसरकार कुछ भी कर सकती है। जो करना चाहिए वह करे ना करे लेकिन वह जरूर कर देगी जिसकी कल्पना करना मुश्किल होता है। बाबा रामदेव की अगवानी के लिए केंद्र के चार वरिष्ठ मंत्री दंडवत करते हुए हवाई अड्डे पहुंचे। यह पहली बार हुआ। बाबा ने तो क्या सोचना था, किसी राजनीतिज्ञ के ख्याल में भी ऐसा नहीं आ सकता कि चार बड़े मंत्री किसी के स्वागत के लिए हवाई अड्डे पर आ सकते हैं। चलो इसे बाबा के चरणों में सरकार का बड़ापन मान लेते हैं। विनम्रता कह सकते हैं। शराफत का दर्जा दे दो तो भी कोई हर्ज नहीं। किन्तु कुछ घंटे के बाद ऐसा क्या हुआ कि सरकार का बड़ापन बोना हो गया। विनम्रता बर्बरता में बदल गई। शराफत के पीछे घटियापन नजर आने लगा। जिस सरकार के मंत्री दिन में किसी सज्जन पुरुष का सा व्यवहार कर रहे थे, रात को उनकी प्रवृति राक्षसी हो गई। रामलीला मैदान में रावण लीला होने लगी। सात्विक स्थान पर तामसिक मनोस्थिति के सरकारी लोग उधम मचाने लगे। सब कुछ तहस नहस कर दिया गया। जिस सरकार को जनता ने अपनी सुरक्षा के लिए चुना, उसी के हाथों उनको पिटना पड़ा। जिस बाबा के चरणों मे सरकार लौटनी खा रही थी उनको नारी के वस्त्र पहन कर भागना पड़ा। इससे अधिक किसी की ज़लालत और क्या हो सकती है। लोकतन्त्र में सरकार का इस प्रकार का बरताव अगर होता है तो फिर तानाशाही में तो पता नहीं क्या कुछ हो जाए। असल में बाबा योग सीखे और फिर सिखाते रहे। राजनीति के गुणा,भाग का योग उनको करना नहीं आया। राजनीति का आसान उनको आता नहीं था। यहीं सब गड़बड़ हो गया। उनको चार मंत्री आए तभी समझ जाना चाहिए था कि सब कुछ ठीक नहीं है। यह सब प्रकृति के विपरीत था। प्रकृति के विपरीत आंखों को,मन को सुकून देने वाला भी हो तो समझो कि कहीं न कहीं कुछ ना कुछ ठीक नहीं है। यह संभल जाने का संकेत होता है। बाबा नहीं समझे। गलत फहमी में रहे। वे ये भूल गए कि

जो लोग इस राष्ट्र को अपनी ही संपति समझते हैं वे अपने काले धन को राष्ट्रीय संपति घोषित करने की मांग क्यों मानेंगे? यह तो डबल घाटा हुआ। अरे भाई, इनके यहाँ तो केवल इंकमिंग ही है, आउट गोइंग वाला सिस्टम तो इनके जीवन में है ही नहीं । ये केवल और केवल लेना जानते हैं देना नहीं। जब इनसे जनता मांग करती है तो इनको ऐसे लगता है जैसे कोई इनकी संपति में से हिस्सा मांग रहा हो। फिर वही होता है जो रामलीला मैदान में हुआ। मजबूर कहते हैंपूरी मैं दिल की छह करूँ या दुनिया की परवाह करूँ, तू बता मैं क्या करूँ। हक के लिए लड़ मरूँ या बैठा आह! भरा करूँ, तू बता मैं क्या करूँ।