हर इन्सान हर पल किसी ना किसी उधेड़बुन में रहता है। सफलता के लिए कई प्रकार के ताने बुनता है। इसी तरह उसकी जिन्दगी पूरी हो जाती हैं। उसके पास अपने लिए वक्त ही नहीं । बस अपने लिए थोड़ा सा समय निकाल लो और जिंदगी को केवल अपने और अपने लिए ही जीओ।
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Sunday, 12 June 2011
कलेक्टर बेटी के रूप में
श्रीगंगानगर--कलेक्टर के रुतबे का प्रभाव जनप्रतिनिधियों पर नहीं पड़ा तो मुग्धा सिन्हा बेटी बन कर सामने आ खड़ी हुई। भावनात्मक अपील के पीछे अपनी सफाई दी। सभी को मीठी चाय का ऑफर दिया। ताकि खिचे,खिजे रिश्तों में मिठास इस प्रकार से घुल जाए ताकि कड़वाहट का नाम निशान भी ना रहे। हुआ भी ऐसा ही। 30 मई को जिला परिषद की बैठक में जो रिश्ते बिगड़े थे,वह 10 जून को वहीं फिर बन गए। शुरू में तो जनप्रतिनिधियों ने मुग्धा सिन्हा को खूब खरी खरी कही। उनपर कर्मचारियों को जप्रतिनिधियों के खिलाफ भड़काने के आरोप भी लगे। बीच में अजयपाल ज्याणी ने कलेक्टर मुग्धा सिन्हा को कुछ कहा। मुग्धा सिन्हा ने ओंठ पर अंगुली रख कर उनको चुप रहने को कहा। काफी देर तक वातावरण में तनाव रहा। कलेक्टर मुग्धा सिन्हा को बोलना ही पड़ा। मुग्धा सिन्हा बोलीं, मैं बोलुंगी तो बोलेगे कि बोलती है। मुझे नहीं मालूम था कि इतने लोग मुझे सुनने को .......... । हम लोग नहीं जनप्रतिनिधि हैं। विधायक पवन दुग्गल बीच में बोले। मुग्धा सिन्हा ने बोलना जारी रखा। शब्दों पर मत जाइए। भावना को समझें। मैंने किसी कर्मचारी को कुछ नहीं कहा। मुझे यहाँ बेटी कहा गया है। भगवान कृष्ण ने द्रोपदी की लाज बचाई। यह वो जिला है जहां कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ वातावरण बना हुआ है। इसलिए मुझे उम्मीद है कि मुझे भी यहाँ सहयोग मिलेगा। भावपूर्ण शब्दों में अपील की आड़ में सफाई देते समय मुग्धा सिन्हा की आँखों में आँसू ने दिखें हों मगर ये तो महसूस हो ही रहा था कि उनका गला भरा हुआ है। कोई महिला भरे सदन में बेटी के रूप में सहयोग मांगे तो कौन ऐसा होगा जो सहयोग नहीं देगा। कलेक्टर मुग्धा सिन्हा के मीठी चाय के आग्रह के साथ ही तनाव समाप्त हो गया। इसके बाद श्री ज्याणी ने अपने विभाग के सवालों का जवाब देते हुए कहा, सारिका ने मुझे बताया था। सारिका चौधरी ने खड़े होकर ऐतराज जताया। इस पर ज्याणी ने कहा, ठीक है आइंदा फॉर्मल रिश्ते रहेंगे। इंफोरमल नहीं। हर किसी को किसी ना किसी रिश्ते से बांधने वाले विधायक राधेश्याम गंगानगर ने श्री ज्याणी को पोता कहा। सदन में इसी प्रकार से रिश्तों की डोर एक दूसरे को बांधती रही। इस प्रकार के सम्बोधन के समय कृषि मंत्री गुरमीत सिंह कुनर ने चुटकी ली। वे बोले, सदन में माँ, बहिन,बेटी, बेटा, पोता...कोई नहीं होता। एक दूसरे को सम्बोधन नाम और पद से किया जाता है। शारदा कृष्ण कहते हैं-अपनों बीच लूटी है लाज,तुम बिन किसे पुकारूँ आज। झूठे को सच मनवाता है, नगर अंधेरा चौपट राज। अब एक एसएमएस—अच्छा दोस्त और सच्चा प्यार 100 बार भी रूठ जाए तो हर बार उसे मना लेना चाहिए। क्योंकि कीमती मोतियों की माला कितनी बार भी टूटे उसे हर बार पिरोया जाता है।
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