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Tuesday, 5 July 2011

कुनर गुजरात की मंडी में



अहमदाबादराजस्थान के कृषि विपणन मंत्री श्री गुरमीत सिंह कुनर ने आज यहाँ से 150 किलोमीटर दूर जीरा और ईसबगोल के लिए विख्यात उंझा मंडी का दौरा किया। उनके साथ गुजरात मार्केटिंग बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों का एक दल था। श्री कुनर ने मंडी की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया। मंडी के चेयरमेन, अधिकारियों के साथ बैठक कर विचार विमर्श किया। उन्होने यहाँ के व्यापारियों,किसानों,जनप्रतिनिधियों से मुलाक़ात की। इसके बाद श्री श्री कुनर आलू की जानी मानी मंडी डीसा पहुंचे। यहां भी श्री कुनर ने मंडी का अवलोकन कर यहां विपणन संबंधी सुविधाओं की जानकारी ली। आलू का प्रोसेसिंग प्लांट देखा। श्री कुनर ने दोनों मंडियों मे बोली की प्रक्रिया भी देखी।श्री कुनर ने अहमदाबाद में आधुनिक कोल्ड स्टोरेज का निरीक्षण कर कृषि उत्पादों के आधुनिक भंडारण तरीकों की जानकारी ली। श्री कुनर अपने अधिकारियों के साथ कल रात अहमदाबाद पहुंचे थे।

बुधवार को श्री कुनर का नासिक की मंडी का अवलोकन करने का कार्यक्रम है। नासिक देश भर प्याज की मंडी के रूप में अपनी पहचान रखता है।

श्री कुनर ने बताया कि राजस्थान मे जितना भी जीरा होता है उसका सत्तर से अस्सी प्रतिशत उंझा मंडी में बिक्री हेतु लाया जाता है। श्री कुनर के अनुसार उनके दौरे का मकसद वह जानकारी लेना है जिसके कारण राजस्थान के किसान इतनी दूर अपनी फसल लेकर आते हैं। ताकि उनको वैसी ही सुविधाएं राजस्थान की मंडियों में उपलब्ध करवाई जा सके। श्री कुनर ने बताया कि किसानों को मंडियों मे सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी जो देश की अन्य मंडियों में है। जिससे किसानों को अपने घर से दूर ना जाना पड़े और फसल का बढ़िया दाम घर के आस पास स्थित मंडी में मिल सके।

Tuesday, 28 December 2010

पहले दो थे अब जितने नेता उतने गुट


श्रीगंगानगर-किसी ज़माने में यहाँ कांग्रेस में दो गुट हुआ करते थे एक राधेश्याम गंगानगर का,दूसरा उनके विरोधियों का। विधानसभा चुनाव से पहले तक कांग्रेस में ऐसा रहा। जब तक ऐसा रहा तब तक राधेश्याम गंगानगर उर्फ़ बाऊ जी ने कांग्रेस में दूसरे की पार नहीं पड़ने दी। वो तो नियम थोड़ा सख्त हो गए इसलिए बाऊ जी के दिन कांग्रेस में खत्म हो गए वरना....... । जब से बाऊ जी का ह्रदय परिवर्तन हुआ है तब से कांग्रेस में दो गुटों वाली परम्परा बीते ज़माने की बात हो गई। कांग्रेस में जो जो नेता बाऊ जी का विरोधी था अब उन सब के अलग अलग गुट बन चुके हैं। राजशाही के अंदाज में कहें तो कांग्रेस के चक्रवर्ती नेता बाऊ जी के विदा होते ही उनके सब विरोधी स्वतन्त्र हो गए। जब किसी का राजनीतिक डर नहीं रहा तो सभी ने अपने गुट बना लिए। हर गुट का अपना नेता। पिरथी पाल सिंह, राज कुमार गौड़, शंकर पन्नू, संतोष सहारण, गंगाजल मील आदि आदि। पिरथी पाल सिंह ने जिलाध्यक्ष के नाते जयपुर दिल्ली के कांग्रेसी राजनीतिक गलियारों में पहचान बने। पद के साथ साथ सादुलशहर के जगदीश शर्मा ने इनके लिए दिल्ली में बड़े नेताओं से लोबिंग की। श्री शर्मा का वहां खुद का एक नेटवर्क है जो कांग्रेस राजनीति में पिरथी पाल सिंह के साथ खड़ा दिखाई देता है। विधान सभा चुनाव के बाद गौड़ की कांग्रेस में अप्रोच बढ़ी है। इसके बावजूद उनको भरोसा केवल अशोक गहलोत पर है। सांसद रहे पन्नू को दिल्ली - जयपुर में नेता जानते हैं मगर इन्होने ने भी अपनी डोर श्री गहलोत जी के हाथ में दे रखी है। संतोष सहारण को कांग्रेस में अपने रिश्तेदार परस राम मदेरणा/मही पाल मदेरणा का सहारा है। गंगाजल मील के पास राजस्थान जाट महासभा है। दो साल में ये दोनों नेता पार्टी की ना तो दिल्ली,जयपुर में किसी बड़ी लौबी से जुड़े दिखे ना इन्होने यहाँ मजबूत गुट दिखाया। जगतार सिंह कंग गत दो साल में कई चुनाव हारने के बाद कहीं के नहीं लगते। के सी बिश्नोई,विजय लक्ष्मी बिश्नोई, सोहन नायक,को वक्त ने पीछे कर दिया। दुलाराम तो ऐसे लगता है जैसे भूतकाल हो गए हों। वर्तमान तो उनका बेटा है। इन्दौरा परिवार के लिए यह सब गौण है। बात कांग्रेस की हो रही है इसलिए मंत्री गुरमीत सिंह कुनर,सभापति जगदीश जांदू के बारे में अधिक कुछ कहना ठीक नहीं । श्री कुनर तो मंत्री हैं इसलिए जयपुर से दिल्ली तक उनके सम्बन्ध पहले से बढे हैं। जांदू का भी एक ग्रुप है। बात फिर बाऊ जी की। पहले उन्होंने कांग्रेस में अपने पर अपने विरोधियों की पार नहीं पड़ने दी अब बीजेपी में। यूँ राजनीति में कभी भी किसी भी सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता। सन्नी सिंह ने एसएमएस से भेजा है परीक्षा का नया पैट्रन --जनरल वर्ग -सभी प्रश्न करो। ओ बी सी --कोई एक प्रश्न करो। एस सी--केवल प्रश्न पत्र पढो। एस टी--परीक्षा में आने का शुक्रिया। गुर्जर--दूसरों को परीक्षा देने की अनुमति प्रदान करने के लिए थैंक्स। अब एक संत से सुनी बात, भारत की राष्ट्रपति हिन्दू,उप राष्ट्रपति मुसलमान,प्रधानमंत्री सिख और सोनिया गाँधी पारसी/ईसाई।
---गोविंद गोयल

Monday, 6 December 2010

सी एम यूँ ही तो नहीं कहते

दुविधा भी है और डर भी। कहीं ऐसा ना हो जाये, कहीं वैसा ना हो जाये। आज के इस दौर में किसी बड़े अफसर के बारे में लिखना,छापना कम हिम्मत का काम नहीं है। सब को याद होगा कुछ दिन पहले मीडिया में श्रीगंगानगर जिले में करप्शन की स्थिति के बारे में छपा था। करप्शन इस देश के कण कण में है। जन्म से लेकर मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए कैश या काइंड के रूप में किसी ना किसी को कुछ देना पड़ता है। फिर सी एम ने यहीं के कलेक्टर क़ो क्यूँ इस बारे में कुछ कहा? कोई तो कारण जरुर होगा।। मुख्यमंत्री कोई बात बेवजह तो नहीं कहते। इसकी वजह है उनका श्रीगंगानगर में आना। उसके बाद यहाँ के प्रभावशाली नेताओं का सी एम के समक्ष रोना। सी एम को वह सब कुछ बताया गया जो नेताओं ने सुना था। सी एम ओ के एक बड़े अधिकारी के खास होने के कारण उनकी नियुक्ति हो गई तो हो गई। अब क्या हो सकता था। ऐसा कौन है जो उनको तुरंत वापिस भेजने की हिम्मत करता। इसलिए माँ -मायत के आगे रोया ही जा सकता था, रो लिए । वो जमाना और था जब तत्कालीन मंत्री गुरजंट सिंह बराड़ ने श्रीगंगानगर में एस पी का चार्ज लेनेआ रहे के एल शर्मा का चार्ज लेने से पहले ही तबादला करवा दिया था। श्री शर्मा तब सीकर ही पहुंचे थे कि उनकी जगह आलोक त्रिपाठी को एस पी लगाने के आदेश सरकार ने दिए। अब बात और है। मंत्री गुरमीत सिंह कुनर का इस मामले में अधिक मगजमारी नहीं करते । जो आ गया वही ठीक है। जब नियुक्तियों में उनका अधिक हस्तक्षेप नहीं है तो प्रशासन उनसे डरता भी नहीं। या यूँ कहें कि वे प्रशासन को डराते ही नहीं। मंत्री होने के बावजूद श्री कुनर के जिले में रहने का अधिकारियों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। ना उनको मंत्री के घर जाना पड़ता है ना उनके आगमन पर सर्किट हाउस । वे खुद भी किसी को नहीं बुलाते। आजकल बिना बुलाये कोई आता भी नहीं। इस से भला मंत्री और कहाँ मिलेगा। इसलिए सब के सब मजे में है सिवाय आम जन के।----अग्रवाल समाज की एक संस्था ने समाज के बुजुर्गों का सम्मान किया। अपने जिला कलेक्टर को भी बुलाया गया था। उनके पिता श्री को तो बुलाना ही था। कलेक्टर तो नहीं आये। उनके बिना ही कार्यक्रम करना पड़ा। कलेक्टर के गुणी पिताश्री मदन मोहन गुप्ता ने एक बात बड़े ही मार्के की कही। वे बोले, मुझे यहाँ इसलिए बुलाया गया है क्योंकि मेरा बेटा यहाँ का कलेक्टर है। वरना मुझे यहाँ कौन आमंत्रित करता। उन्होंने अपनी बात को विस्तार दिया, सभी को अपने बच्चों को पढ़ा कर इस लायक बनाना चाहिए ताकि परिवार को सम्मान मिल सके। बात तो सच्ची है। बेटा कलेक्टर है तभी तो मंच पर विराजे, नहीं तो उनके जैसे बुजुर्गों की श्रीगंगानगर में कोई कमी थोड़ी थी।-----राज्य के मंत्री गुरमीत सिंह कुनर इस बारे जिले के लम्बे दौरे पर हैं। उनसे मिलना कोई मुश्किल नहीं है। जल्दी उठने वाले सुबह दस- साढ़े दस बजे तक उनसे गाँव में मिल सकते हैं। उसके बाद श्रीकरनपुर विधानसभा क्षेत्र में लगने वाले किसी शिविर में। जहाँ प्रशासन आया हुआ होता है। पता चला है कि श्री कुनर कम से कम एक सप्ताह तो यहाँ हैं ही। इस बार पहले एस एम एस। भेजा है राकेश मितवा पत्रकार ने वह भी बिना एडिट किये--"बाबा साहेब के परिनिर्वाण दिवस पर कल पी आर ओ ऑफिस में एक प्रोग्राम होगा। प्लीज़ सभी मीडिया कर्मियों कोआमंत्रित करो ई टी वी सहित। मेरी पत्नी बाबा साहेब पर लेक्चर देगी।--कलेक्टर। " अब एक शेर शकील शमसी का--शाम के वक्त वो आते ही नहीं छत पै कभी, आपने इनको नहीं चाँद को देखा होगा।