Monday 25 July 2011

समाज को पल्ले बांधने की तैयारी



श्रीगंगानगरसवा दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को निगाह में रख अग्रवाल समाज को सभापति जगदीश जांदू का पल्लू थमाने की तैयारी है। इसके लिए ताना बाना बुन लिया गया है। अग्रवाल सेवा समिति के अध्यक्ष नत्थू राम सिंगला के हाथ में इस महत्वपूर्ण काम की कमान है जो पार्षद के नाते जांदू के करीबी हैं। समिति के छात्रवृति कार्यक्रम में गए समाज के जाने माने व्यक्तियों ने यह सब अपनी आँखों से देखा। दिल से महसूस किया। यहां जगदीश जांदू एंड कंपनी प्रमुखता से मौजूद थी। खुद जगदीश जांदू मंच पर थे। उनके साथ थे आयुक्त हितेश कुमार । अनेक पार्षद अग्रिम पंक्ति में स्थान पाए हुए थे। किसी समाज के कार्यक्रम में किसी गैर अग्रवाल राजनेता की कंपनी की उपस्थिति नई थी। अगर जांदू एंड कंपनी को जनप्रतिनिधि के नाते बुलाया गया तो फिर विधायक राधेश्याम गंगानगर को बुलाया जाना और भी बेहतर होता। आयुक्त के स्थान पर या उनके साथ जिला कलेक्टर की मौजूदगी समारोह को और भी भव्य बनाती। सत्ता के निकट समाज को ले जाना है तो फिर गौड़ साहब कौन सा दूर थे। नगर में रहने अन्य समाज से तालमेल बढ़ाना की इच्छा थी तो फिर अरोड़ा,ब्राह्मण,राजपूत,सिख,नायक,मेघवाल .......... समाज के अध्यक्षों को बुला सम्मानजनक स्थान पर बिठाया जाता। लेकिन ऐसा तो दिल में था ही नहीं। ये नेता जांदू के विरोधी हैं। जबकि श्री सिंगला जांदू के पाले में। जब वे उनके साथ है तो उनका पहला कर्तव्य है अग्रवाल समाज को जांदू का पल्लू पकड़वाना। समिति के मुख्य संरक्षक बी डी अग्रवाल की भी इसमें मूक सहमति दिखी। वरना जांदू एंड कंपनी को बुलाना असंभव था। जांदू की एक मात्र ख़्वाहिश विधायक बनना है। अग्रवाल समाज श्री सिंगला के पीछे लग अगर जांदू का पल्लू पकड़ लेता है तो उसे और क्या चाहिए। यह उनकी लीडरशिप में अग्रवाल समाज का नया इतिहास लिखे जाने का संकेत है। संकेत है नई चेतना का। क्योंकि दूसरे समाज के राजनेता,उसके समर्थक जनप्रतिनिधियों को बुलाने की पहल उनकी ही है। यह उनके खुले विचारों का कमाल है। देखना ये कि अग्रवाल समाज इस बात को समझता है या नहीं। फिलहाल वे जांदू को यह संदेश देने में सफल हो गए कि मेरे नेतृत्व में अग्रवाल समाज उनके साथ है। अग्रवाल समाज अपनी शोभा यात्रा में श्री सिंगला के नेतृत्व में यह नारा जांदू तुम आगे बढ़ो,अग्रवाल तुम्हारे साथ हैं लगाते दिखे तो अचरज नहीं होना चाहिए। मजबूर कहते हैंजो झूठ पे खुल्ला वार करे,जो सच पे जां निसार करे,जो साफ कहे जो साफ रहे, बेखौफ हो हक की बात कहे। खुदगर्ज तेरी दुनिया वाले इसको बगावत कहते हैं।

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