Wednesday 13 June 2012

राज हठ से टूट सकता है ओवरब्रिज का सपना


राज हठ से टूट सकता है ओवरब्रिज का सपना
श्रीगंगानगर- बाल हठ,त्रिया हठ और राज हठ इनका कोई तोड़ किसी के पास नहीं। घर,समाज देश को इनसे वास्ता पड़ता रहता है। बाल हठ मासूमियत लिए होता है।  त्रिया और राज हठ तो ऐसे विचित्र होते हैं कि दुनिया पनाह मांगने लगती है। देश त्रिया हठ से त्राहि त्राहि कर रहा है। मनमोहन सिंह को  पीएम रखना सोनिया का त्रिया हठ ही तो है। श्रीगंगानगर शहर इन दिनों राज हठ से पीड़ित है। राज हठ के प्रतीक हैं जिला कलेक्टर अंबरीष कुमार। इनका हठ है कि ओवरब्रिज बनेगा तो  करनी मार्ग पर ही बनेगा...चाहे जो हो। इनको इस बात से कोई मतलब नहीं कि यह व्यवहारिक है या नहीं। इनको इस बात से भी कोई लेना देना नहीं कि ओवरब्रिज कहां अधिक उपयोगी है। कहां बनाने से जनता को अधिक सुविधा होगी। बस,कह दिया सो कह दिया। उनके इस हठ के कारण गुड के गोबर होने की आशंका हो गई है। इतने अधिक नेताओं के रहते कलेक्टर साहब को कोई यह बताने वाला नहीं है क्या कि ओवरब्रिज की उपयोगिता कहां है। पर ये तो इनसे डरे,सहमे हैं।ये क्यों बताने लगे। पूरा शहर जानता है कि लक्कड़ मंडी से अधिक उपयोगी जगह ओवरब्रिज के लिए हो ही नहीं सकती। नेशनल हाई वे है....कमर्शियल क्षेत्र है...फाटक से पहले रेल का शैंटिंग  प्वाइंट है...जिसके कारण फाटक बार बार बंद रखना पड़ता है। सूरतगढ़ से लेकर यहां तक कोई मौड़ नहीं। रात को कितना भी ट्रैफिक निकले किसी को कोई तकलीफ नहीं। इसमे कोई शक नहीं कि ओवरब्रिज के निर्माण के कारण यहां का कारोबार प्रभावित होगा....लोगों को नुकसान उठाना पड़ेगा...प्रॉपर्टी की कीमत पर असर होगा...। लेकिन बड़े विकास होते हैं तो यह सब होना स्वाभाविक है। इसके लिए लोग मानसिक रूप से तैयार भी हो चुके थे। राज हठ ने इनका मन फिर बदल दिया। अब चलते हैं करनी मार्ग पर। नेशनल हाईवे से आने वाले वाहन कितने मौड़ काटेंगे...मीरा मार्ग पर तो दिन में ही ट्रैफिक बहुत है....रात को तो फिर क्या हाल होगा। लोग तो रात को चैन से शायद ही सो पाएंगे। मीरा चौक पुलिस चौकी की कीमत बढ़ जाएगी। खीची चौक पर भी जगह बढ़ानी पड़ेगी...हां सभी किसी ना किसी कारण से परेशान होंगे...विकास होता है तो परेशानी होती ही है...परंतु विकास भी तो वहीं हो  जहां उसकी उपयोगिता अधिक हो...लोगों को परेशानी कम से कम। करनी मार्ग पर ओवरब्रिज बनने से लक्कड़ मंडी के ट्रैफिक की समस्या तो वैसी की वैसी रहेगी...करनी मार्ग वाले दुखी हो जाएंगे...बस डेंटल कॉलेज की बल्ले बल्ले जरूर  हो जाएगी। राज हठ यही तो चाहता है शायद...। कचरा पुस्तक की दो लाइन हैं...मैं तो डायरी हूं तेरे मन की जो कुछ तू लिखेगा,ये वादा रहा उसमे तेरा ही अक्स दिखेगा।


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