--- चुटकी---
पी एम
मजबूर है,
उनका यही
सबसे बड़ा
कसूर है।
दे दो इस्तीफा
छोड़ दो पद
सोनिया का घर
कौनसा दूर है ।
हर इन्सान हर पल किसी ना किसी उधेड़बुन में रहता है। सफलता के लिए कई प्रकार के ताने बुनता है। इसी तरह उसकी जिन्दगी पूरी हो जाती हैं। उसके पास अपने लिए वक्त ही नहीं । बस अपने लिए थोड़ा सा समय निकाल लो और जिंदगी को केवल अपने और अपने लिए ही जीओ।
Wednesday, 16 February 2011
Monday, 14 February 2011
वो प्यार है
शोखियों में
घोला जाए
फूलों का शबाब
उसमे फिर
मिलाई जाए
थोड़ी सी शराब
होगा वो
नशा जो तैयार
वो प्यार है........
घोला जाए
फूलों का शबाब
उसमे फिर
मिलाई जाए
थोड़ी सी शराब
होगा वो
नशा जो तैयार
वो प्यार है........
Sunday, 13 February 2011
Saturday, 12 February 2011
दोस्ती ऐसे टूटती है
Both Friends Will Think The Other Is Busy And Will Not Contact. Thinking It May Be Disturbing. As Time Passes Both Will Think Let The OTher Contact. After That each Will Think Why I Should Contact First ? .Here Your Love Will Be Converted To Hate .Finally Without Contact The Memory Becomes Weak .They Forget Each Other. So Keep In Touch With All And Pass This TO All Your Friends... . I Don`t Want To One Of This Kind. So Here I Am sending Mail To you To Say Dear
I Am Fine Here Please keep in touch with me.... Ha Ha Ha Ha ... Have a Nice Day....
I Am Fine Here Please keep in touch with me.... Ha Ha Ha Ha ... Have a Nice Day....
Thursday, 10 February 2011
सत्य मेव जयते! सॉरी रोंग नंबर लग गया
सच्चाई की जीत होती है। सच से बड़ा कोई नहीं। सच कभी नहीं हारता। सदा सच ही बोलो। ये वाक्य मास्टरों से लेकर घर के बड़ों से सुनते आये हैं। सद्पुरुष भी यही कहते हैं। शास्त्रों, ग्रन्थों में भी ऐसा ही लिखा हुआ है। अगर किसी ने इस सच्चाई का सामना ना किया हो तो वह चुटकियों में रूबरू हो सकता है। अशोक स्तम्भ! कौन नहीं जानता! सरकार का राज चिन्ह। संवैधानिक पदों का प्रतीक। इसके नीचे लिखा हुआ है, सत्य मेव जयते! ये हमने या आपने नहीं लिखा। सरकार ने लिखा। आज तक लिखा रहता है। भारतीय नोटों पर भी यही अंकित है। परन्तु व्यवहार में सबकुछ इसके विपरीत है। दो और दो को चार कहना अपने आप को संकट में डालना है। आप से सब कुछ नहीं तो बहुत कुछ छीना जा सकता है। यही तो हो रहा है आमीन खां के साथ। कांग्रेस कल्चर को सहज भाषा में बताना,कार्यकर्ताओं को समझाना उनके लिए परेशानी का सबब बन गया। उन्होंने उदाहरण देकर अपनी बात में वजन डाला। यही वजन अब उनसे, उनके आकाओं से सहन नहीं होगा। सरकार आजादी के बाद से जिस सत्य मेव जयते का ढिंढोरा पीट रही है वही सत्य आमीन खां के लिए चिंता का कारण बन गया। जिस सत्य को संवैधानिक पद के लिए अशोभनीय टिप्पणी बताया जा रहा है उसी संवैधानिक पद के प्रतीक अशोक स्तम्भ के नीचे हमेशा से लिखा हुआ है -सत्य मेव जयते। तो क्या यह गलत लिखा हुआ है। संवैधानिक पद सत्य मेव जयते से भी बड़ा हो गया! या इस पद पर विराजमान इन्सान के पास सत्य का सामना करने की ताकत नहीं। मुख्य सतर्कता आयुक्त भी तो संवैधानिक पद है। श्री थामस कौनसी संवैधानिकता का निर्वहन कर रहे हैं? आमीन खां का बयान सत्य है तो उनको सजा क्यों मिले! पद से वो लोग हटें जिन्होंने चरण चाटुकारिता के जरिये पद प्राप्त किये हैं। इसमें भी कोई दो राय नहीं कि सच की अपनी गरिमा होती है। सच कहाँ,किसके सामने,किसके लिए,किस बारे में,कब कहना है, यह बहुत ही महत्वपूर्ण होताहै। कोई सच चारदीवारी में ही सबको अच्छा लगता है। यही सच बाहर आते ही अफसाना बनते देर नहीं लगाता। यही हुआ आमीन खां के साथ। किसने किस की रसोई में काम किया और किसने लड़की शादी में झूठे बर्तन साफ़ किये। ये सब आपसी सम्बन्धों पर निर्भर करता इन रिश्तों को महसूस किया जाता है,उजागर नहीं। क्योंकि इसको सब जानते ही होतेहैं। सहज भाषा में आमीन खां ने एक सच कहा और आज वह उनके लिए भारी पड़ गया। उनको पता होता कि मेरे साथ ऐसा होगा तो वे कभी इस बारे में कुछ नहीं कहते। वैसे आजकल सच बोलने वाले हैं ही कितने! सच सुनने वालों की संख्या भी ऐसी ही होगी। हकीकत तो ये कि सच सुनने की हिम्मत नहीं रही इसलिए बोलने वाले भी नहीं रहे। कभी किसी की जुबां से गलती से सच निकल भी जाये तो उसको निगलना मुश्किल हो जाता है। यही हुआ आमीन खां के साथ और यही हो रहा है उसके बाद। पंजाबी में किसी ने कहा है --इन्ना सच ना बोलीं कि कल्ला रह जावें, चार बन्दे छड्ड देंवी मोड्डा देण लई।
Tuesday, 8 February 2011
हे अफसर तुम महान हो
श्रीगंगानगर-देश -विदेश के नेताओं की तरफ फैंके गए सभी जूतों को प्रणाम और मायावती की "खडाऊं" को वंदना। मुख्यमंत्री मायावती के जूते एक अफसर ने साफ़ क्या कर दिए मीडिया में हल्ला मच गया। जैसे अफसर ने राजकीय मेहमान कसाब जैसा कोई गुनाह कर दिया। उसकी मज़बूरी तो किसी को दिखाई नहीं दी। नौकरी करनी है तो ऐसा करना ही पड़ता है। सबके सामने जूते पर रुमाल या कपड़ा मार दिया तो अफसाना बन गया,क्या पता अन्दर पालिश भी करनी उसकी मज़बूरी हो। फिर अफसर ने किसी ऐरेगेरे नत्थू खेरे के जूतों के तो हाथ नहीं लगाया। अफसर का सौभाग्य है कि उसे इस युग में ऐसी महिला के जूते चमकाने का मौका मिला जो देश के दलितों की किस्मत चमकाने के लिए अवतरित हुई है। अवतार रोज रोज इस धरा पर नहीं आते। पता नहीं कितने ही सद्कर्मों के उपरांत इस अफसर को इस अलौकिक आत्मा रूपी मायावती के जूते चमकने का अवसर मिला होगा। धन्य हो गया उसका जन्म। बडभागी है उसका परिवार। भाग्यशाली हैं वे लोग जो उस अफसर को जानते हैं,उस से मिलते हैं, उसके साथ रहते हैं। मीडिया कुछ दिखाए और लिखे। हे ! अफसर आपको विचलित नहीं होना है। जब भी इस प्रकार की सेवा मिले तुरंत करना। महान आत्माओं की निष्काम सेवा, चाकरी से बढ़कर इस कलयुग में और कुछ नहीं है। ऐसी चरण चाकरी से ही तुझे इस संसार में आगे बढ़ने के ढेरों मौके मिलेंगे। अगर तू आलोचनाओं से घबरा गया, भटक गया तो कल्याण नहीं होगा। मोक्ष को तरस जायेगा। माया तो क्या किसी भिखारी के जूते भी हाथ लगाने को उपलब्ध नहीं होंगे। हे! पुलिस अधिकारी तू तो मिसाल है विनम्रता की,सेवा भावना की। पुलिस वाले तो अपने जूते साफ़ करवाने के मास्टर होते हैं। तूने एक दलित महिला के जूते साफ़ कर देश की तमाम पुलिस का सर गर्व से ऊँचा कर दिया। ये साबित कर दिया कि पुलिस कितनी कर्तव्य परायण है। हे! अफसर तूने दिखा दिया कि हम ताकतवर के जूते चमकाने में कोई जलालत महसूस नहीं करते। आज गोपी फिल्म का यह गाना सार्थक हो गया-चोर उचक्के नगर सेठ और प्रभु भगत निर्धन होंगे,जिसके हाथ में होगी लाठी भैंस वही ले जायेगा। हे!अफसर ऐसी विनम्र निष्काम सेवा को देख कर पुलिस तुझे अपना आदर्श मानेगी। हो सकता है जलोकडे किस्म के पुलिस वाले , जिनको इस सेवा के काबिल नहीं समझा गया, आपसे बैर रखे। आपके काम में बाधा डालने की की कोशिश करे। पर हे!महान पुलिस अधिकारी तुमको इनकी ओर ध्यान नहीं देना। ऐसे कलयुगी प्राणी तेरी इस अनोखी तपस्या को भंग करने का प्रयत्न कर सकते हैं। क्योंकि ये खुद तो सेवा कर नहीं सकते कोई करे तो इनके पेट में दर्द होने लगता है। ऐसे ना समझ प्राणियों के प्रति दिल में कोई भेद मत रखना। हे! अफसर अब तेरा स्थान इस सबसे से ऊपर बहुत ऊपर है। आप कोई साधारण इन्सान हो नहीं सकते। इतनी महान सेवा के लिए संसार में कोई नोबल,आस्कर होता तो वह आज आपके पास आकर गौरवान्वित हो जाता । देश की पुलिस संभव है कोई नई शुरुआत करके इतिहास में नया पन्ना जोड़े। हे ! अफसर आपके नाम, काम के बिना तो भारत का आधुनिक इतिहास पूरा ही नहीं हो सकता। उस दिन इस देश की शिक्षा में चार चाँद लग जायेंगे जब आपकी सेवा के तराने हर शिक्षण संस्था में गर्व से गए जायेंगे। मजबूर का शेर है--आदत है ज़माने कि दिल रखने की,कह दे जो साफ वो मेहरबां अच्छा।
Tuesday, 1 February 2011
हेलमेट
श्रीगंगानगर--पुलिस जी जयहिंद!......आज आपको जयहिंद का जवाब देने का समय नहीं हैं। हो भी कैसे, सब के सब तो जनता को हेलमेट पहनाने में लगे हैं। आपने अपनी पूरी ताकत इसी काम में लगा रखी है। लगा क्या रखी है झोंक रखी है। क्योंकि आपकी नजर में शहर में होने वाले सभी अपराधों से मुक्ति पाने का हेलमेट ही एक मात्र उपाए हैं। "हेलमेट पहनाओ,अपराध घटाओ ।" यह नया नारा है। राजस्थान की पुलिस अपनी प्राथमिकता तय करती है। नगर के मिजाज के अनुसार वहां के अधिकारियों के सामने कुछ अलग प्रकार की प्राथमिकता भी हो सकती है। पुलिस जी, आपकी एक मात्र प्राथमिकता है सबको हेलमेट पहनाना। नगर में चोरी,चैन स्नेचिंग, लड़कियों से छेड़छाड़, आवारा किस्म के लोगों की सड़कों पर मनमानी ,रात को इधर-उधर जाना पड़जाये तो लुटने का भय । यह सब कुछ उस दिन गधे के सर से सींग की तरह गायब हो जायेगा जब सब हेलमेट में नजर आयेंगे। साइकल पर आवाजाही करने वाले हो या पैदल चलने वाला सबको हेलमेट जरुरी करना होगा। पता नहीं कब इनमे से कोई सड़क पर दुर्घटना का शिकार हो जाये। सबकी सुरक्षा तो जरुरी है। वैसे पुलिस जी आपको डरते डरते बता दूँ कि आजतक शहर में एक भी दुर्घटना ऐसी नहीं हुई जो यह कहती हो कि हेलमेट नहीं था इसलिए मर गया। एक बात और , श्री पुलिस जी यहाँ समस्या हेलमेट की नहीं है, समस्या है अस्त व्यस्त ट्रैफिक। ट्रैफिक सिस्टम सही नहीं है तो फिर कितने भी हेलमेट पहना दो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। पुलिस जी, आपने जितनी ताकत हेलमेट पहनाने में लगाई है उतनी ट्रैफिक सुधार में लगाते तो सब कुछ नहीं तो बहुत कुछ तो ठीक हो जाता। पुलिस जी, आप विचार करके देखो क्या यह शहर इतना बड़ा हो गया कि यहाँ हेलमेट के बिना काम नहीं चल सकता! ले दे के ढाई सड़क हैं। राजमार्ग १५, रविन्द्र पथ ,हनुमानगढ़ रोड बस। हेलमेट के लिए कानून के साथ व्यवहारिकता भी अपने साथ रखो पुलिस जी। शहर से बाहर जाने वाले मार्गों पर नाके लगाओ। वहां दो पहिया वाहन चालकों के ही क्यों उसके साथ बैठने वाले को भी हेलमेट पहनाओ। पुलिस जी, शहर में कोई नेता,प्रभावशाली सामाजिक आदमी, आप तक यह बात कहने वाला कोई व्यापारी नेता नहीं, इसलिए मुझे ही यह लिखना पड़ा। ये बात ऐसे ही नहीं कह रहा। पुलिस जी आपको बताऊँ , मैंने जनप्रतिनिधि,नेता,व्यापारी नेता, बड़े सेठ ,सामाजिक आदमी, सभी से बात की। मगर लगता है किसी की हिम्मत आपके समक्ष शहर की सच्चाई रखने की नहीं हुई। कोई क्यों आपको नाराज करने लगा। सौ काम पड़ते है पुलिस जी आपसे इनको। इसलिए सब देख रहे हैं आपका हेलमेट पहनाने का अभियान। जनता के फोन इनके पास जायेंगे। जनता पर अहसान जताने के लिए पुलिस जी ये आपको फोन करेंगे। आपके पास इन पर अहसान जताने का मौका होगा। इसी से सामाजिक सम्बन्ध ताकतवर बनते हैं। तो पुलिस जी ये तय रहा कि शहर में चोरी होती है तो होती रहे। वाहनों की चोरी की रिपोर्ट दर्ज करें या ना करे। कोई सरे राह किसी की चैन छीनता है तो छीने। लड़कियों को छेड़ता है तो छेड़े । सड़कों पर मर्जी से वाहन पार्क करके सड़क रोकता है तो रोके, आपको इनकी तरफ कोई ध्यान नहीं देना। पुलिस जी अब आपका एक ही लक्ष्य है कि श्रीगंगानगर में सड़क पर आवाजाही करने वाला कोई भी वह सर जो कार में ना हो बिना हेलमेट के नहीं रहना चाहिए। गुड लक। किसी शायर ने कहा है ...अब तो यकीं मानिए जीने को भी जी नहीं,पर जहर भी तो मुफ्त कब आवे है साहब जी। राजू ग्रोवर का एस एम एस-डियर गोड , जो इस एस एम एस को पढ़ रहा हो उसे दुनिया की हर ख़ुशी देना। क्योंकि कुछ लोग हमेशा मुस्कुराते हुए ही अच्छे लगते हैं।
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