Saturday, 15 May 2010

कौन बताएगा जात

---- चुटकी----

ना
बनी नहीं
ये बात,
जनगणना में
कौन बताएगा
नेताओ की जात।

कुछ पाने के लिए सब कुछ खोया


ठीक है कुछ पाने के लिए
कुछ ना कुछ
खोना ही पड़ता है,
मगर ये नहीं जानता था कि
मैं, कुछ पाने के लिए
इतना कुछ खो दूंगा कि
मेरे पास कुछ और पाने के लिए
कुछ भी तो नहीं बचेगा,
और मैं थोडा सा कुछ
पाने के लिए
अपना सब कुछ खोकर
उनके चेहरों को पढता हुआ
जो मेरे पास कुछ पाने की
आस लिए आये हैं,
लेकिन मैं उनको कुछ देने की बजाए
अपनी शर्मसार पलकों को झुका
उनके सामने से
एक ओर चला जाता हूँ
किसी और से
कुछ पाने के लिए।

Friday, 14 May 2010

एक व्यापारी ऐसा भी

---- चुटकी----

हमारी गली में
एक व्यापारी
आता है,
खुशियों के बदले

सबके
गम ले जाता है।
सौदा घाटे का
करता है,
मगर खाते में
मुनाफा दिखाता है,

Thursday, 13 May 2010

तुम्हारी किताबों की किस्मत

मुझसे अच्छी है तुम्हारी इन
किताबों की किस्मत
जिन्हें हर रोज तुम
अपने सीने से लगाती हो,
मेरे बालों से भी
अधिक खुशनसीब हैं
तुम्हारी किताबों के पन्ने
जिन्हें तुम हर रोज
प्यार से सहलाती हो,
मेरी रातों से भी हसीं हैं
तेरी इन किताबों की रातें
जिन्हें तुम अपने
पास सुलाती हो,
इतनी खुशनसीबी देखकर
तुम्हारी इन किताबों की
मेरी आँखे सुबह शाम
बार बार बस रोती हैं,
क्योंकि हर नए साल
तुम्हारे सीने से लगी
एक नई किताब होती है,
और वो पुरानी किताब
पड़ी रहती है
अलमारी में एक तरफ
गोविंद की तरह
इस उम्मीद के साथ कि
एक बार फिर उठाकर
अपने सीने से लगा लो
शायद तुम उस किताब को ।

Wednesday, 12 May 2010

साथी तू बिछड़ गया,तोड़ी दोस्ती

आज एक ऐसा काम करना पड़ा जो मैं समझता था कि मुझे नहीं करना पड़ेगा।तीस साल पुराने मित्र को अपने कंधे पर वहां सदा के लिए छोड़ आया जहाँ जाना कोई नहीं चाहता लेकिन जाना सबको पड़ेगा। बात १९८० के आस पास की है।हरी किशन अग्रवाल उम्र में मुझसे कोई पांच साल छोटा था। दोस्ती हुई, ना जाने कैसे हमारे ग्रुप में उसका नाम एक्स्ट्रा प्लयेर हो गया। इंजीनियर बनना चाहता था, मगर सफलतम कारोबारी बन गया। बीज के कारोबार में उसने वह तरक्की की जो लोग कई दशक तक नहीं कर सकते। तीस साल में कभी उसको गुस्सा करते नहीं देखा। कोई दोस्त नाराज होता तो बस मुस्कुरा कर उसकी नाराजगी दूर कर देता।१०-११ मई की रात को पंजाब में एक सड़क दुर्घटना ने उसकी जान ले ली। आज उसके दस साल के लड़के ने सफ़ेद धोती बांध कर अंतिम क्रिया करवाई तो दिल के जैसे टुकड़े टुकड़े हो गए। आँख से आंसू तो नहीं निकले लेकिन रोम रोम अन्दर से रो रहा था। इसकी तो कल्पना ही नहीं की थी कि ऐसा देखना पड़ेगा। उम्र तो मेरी अधिक थी चला वह गया। उसकी मौत के समाचार से लेकर अब तक आँखों में बस उसी और उसीके साथ बिताये पलों का स्लाइड शो चल रहा है। हालाँकि वह हमारे ग्रुप का एक्स्ट्रा प्लयेर था, इसके बावजूद वह अपनी इनिंग खेल कर चला गया। इनिंग भी शानदार,जानदार दमदार।
एक बार मैंने उसके घर फोन किया, उसकी मम्मी ने फ़ोन उठाया। मैंने कहा,आंटी हरी से बात करवाना। आंटी ने कहा-हरी तो गोविंद के साथ फिल्म देखने गया है। मैंने बताया कि मैं गोविंद ही बोल रहा हूँ। तब आंटी को गुस्सा आया और मुझे हंसी। शाम को जनाब मिले, उससे कहा भई तूने फिल्म जाना था तो मुझे बता तो देता ताकि तेरा झूठ सच बना रहता। आज भी यह बात हम लोग भूले नहीं हैं। मगर अब वह नहीं जिसके साथ इस बात को लेकर चुहल बाजी किया करते थे। उसके दो मासूम लड़कों को देखने की हिम्मत नहीं हुई, उनसे बात करने का हौसला तो होते होते ही होगा।

Sunday, 9 May 2010

माँ सा कोई नहीं


माँ! क्या है माँ? कौन होती है माँ? कैसी होती है माँ? इन प्रश्नों के उतर हर किसी ने अपनी समझ से दिए है। कोई कहता है कि माँ एक सीप है जो अपनी संतान के लाखो रहस्य सीने में छुपा लेती है। माँ ममता की अनमोल दास्ताँ है। जो हर दिल पर अंकित है। भगवान कहता है कि माँ मेरी ओर से मूल्यवान और दुर्लभ उपहार है। इसके कदमो में स्वर्ग है। मै भी इसके आगे नत मस्तक हूँ । हर संतान को माँ की ममता नसीब है।
माँ वो है जिसने नो माह गर्भ में रखकर हमे मानव का रूप दिया। जिसने पंचतत्व से बने शरीर में जान डाली। जिसने दूध पिलाकर हमे बड़ा किया है। हमारी हर गलती पर हमे समझाया है। हमने चाहे उसे दुःख दिया पर उसने हमे हमेशा सुख दिया। हमारे दुखो को उसने अपनी खातिर मांग लिया। वो हमारी प्रथम गुरु बनी। हमे बोलना सिखाया। हमे संस्कार दिए, संसार में जीने लायक बनाया। कहानी, लोरी सुनकर हमे ज्ञान दिया। माँ की महिमा को हम शब्दों में बयान नहीं कर सकते। उसने हमे इतने उपहार दिए जिसकी गिनती मुश्किल है। हमे व्यंजन देकर खुद रुखा सुखा खाया।
जिस व्यक्ति को जीवन में माँ का प्यार मिले आशीर्वाद मिले वो किस्मत वाले होते है। माँ के बारे में लिखे तो शब्द कम पद जाते है। कितना भी लिख ले लगता है कि अभी तो कुछ लिखा ही नहीं। उसकी सहनशीलता, ममता , प्यार, दुलार, दया, तपस्या, अनुराग, वात्सल्य, स्नेह, संस्कार, के बारे में तो हम लिख ही नहीं पाए। शायद कभी लिख भी नहीं पाएंगे। क्योंकि इन शब्दों को न तो परिभाषित किया जा सकता है और न ही इनका वर्णन किया जा सकता है। माँ से जुड़े ये सारे शब्द माँ के बारे में सिर्फ एक ही बिंदु बता पते है। माँ शब्द फिर भी अनसुलझा रह जाता है। जिस शब्द की व्याख्या भगवान भी न कर सका, उस शब्द की व्याख्या करने की कोशिश हमे बेकार मालूम पड़ती है। हम तो सिर्फ उस माँ के चरणों में शत शत प्रणाम करते है। हम उसे कुछ और तो डे नहीं सकते सिर्फ मदर्स डे के रूप में अपने साल का एक दिन उसे जरुर डे सकते है। अपनी कृतज्ञता माँ को प्रकट कर सकते है। मदर्स डे पर माँ को हमारा कोटि कोटि प्रणाम। अभी भी एसा लग रहा है मानो कुछ लिखा ही नहीं। माँ के बारे में लिखने के लिए शब्द ही नहीं। असंख्य शब्दों का ज्ञाता भी माँ के बारे में लिखते समय शब्द विहीन सा हो जाता है। अंत में सिर्फ इतना ही-जिंदगी में खुशिया भर देती है माँ , हमारे ख्वाबो को हकीकत बनती है माँ, बेनूर जिंदगी कि महकती है माँ, पथरीले पथ पर चलना सिखाती है माँ।
मेरे पापा के अस्पाल में व्यस्त होने के कारन आज मुझे इस पोस्ट पर लिखने का मौका मिला है। मै स्वाति अग्रवाल गोविंद गोयल की छोटी बेटी हूँ ।

Thursday, 6 May 2010

----चुटकी----

हमारे धर्मनिरपेक्ष
नेताओं को
आदाब,
कसाब भी
बन गया
अफजल की भांति
देश का दामाद।

जीवन का सार

---- चुटकी----

सर्दी
प्रचंड गर्मी
आंधी
फिर
बरखा बहार,
मानो ना मानो
यही है
हमारे

जीवन का सार।

Wednesday, 5 May 2010

----चुटकी----

हमारे नेता हैं
बच्चो
बड़े कमाल के,
अफजल की भांति
कसाब को
रखेंगें
संभाल के ।

Tuesday, 4 May 2010

अब कसाब

---- चुटकी---

पहले
अफजल
अब कसाब,
आप इनका
क्या करोगे
जनाब।