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Tuesday, 24 August 2010

बेगाना सा रहता हूँ

अपनों के बीच
बेगाने की तरह
रहता हूँ,
कोई क्यों जाने
क्या क्या
सहता हूँ,
वो पतझड़
समझते हैं
जो
बसंत कहता हूँ।

Wednesday, 20 January 2010

बसंत और पतझड़


तेरा जाना पतझड़
तेरा आना बसंत,
मन एक
कामनाएं अनंत।
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बसंत से सराबोर
हर उपवन,
पतझड़ सा वीरान
तेरा मेरा मन।