Thursday 17 May 2012

गौरव की बात है आईपीएस होना यहां आना हमारा दुर्भाग्य



श्रीगंगानगर-श्रीमानआईपीएस गगनदीप सिंगला जी बिना नमस्कार के ही बात शुरू करनी पड़ेगी....क्योंकि आप अहंकारी हो,अव्यवहारिक हो ....आपने नमस्कार का जवाब देना नहीं इसलिए आपको नमस्कार करके अपना अपमान क्यों करवाऊँ। सिंगला जी आपने आईपीएस बनकर यहाँ की जनता पर कोई अहसान नहीं किया। ना तो जनता ने आपके यहां जाकर आपके परिवार से अनुनय विनय की और ना भगवान से प्रार्थना। यह सौ प्रतिशत आपकी मेहनत,लगन और परिवार की मंगलभावना थी जो आप आईपीएस बने। हमारा दुर्भाग्य जो आप प्रशिक्षण के लिए यहां आए। दुर्भाग्य इसलिए कि जो यहां प्रशिक्षण प्राप्त करता है वह एक दिन एसपी बनकर यहां आता है। अगर आप एसपी बनकर आए और आपका स्वभाव और व्यवहार यही रहा तो आपको तो पता नहीं लेकिन जनता को मुश्किल होगी...बहुत मुश्किल। मैंने तो पढ़ा था....आपने पढ़ा कि नहीं पता नहीं...कि ज्ञानवान,गुणवान,बड़े पद वाले इंसान बहुत विनम्र,शालीन होते हैं...आपके इर्द गिर्द तो यह सब है ही नहीं। आईपीएस होना अलग है और ज्ञानवान,गुणवान,व्यवहार कुशल,संस्कारी होना अलग।आईपीएस तो किताबें रट कर मेहनती युवक बन सकता है। परंतु दूसरे गुणों के लिए अपने अंदर झांकना पड़ता है। दूसरों का दर्द,पीड़ा को समझना होता है। ये सब आप करेंगे ऐसा आपका व्यवहार से लगता नहीं।  आईपीएस बनना खुद के लिए,घर,समाज,राज्य के लिए गौरव की बात है। यह गौरव आप  बढ़िया काम से,विनम्रता से,व्यवहार कुशलता से और अधिक बढ़ा सकते हो। यह सब करने का आपके पास अभी तो समय है। एक बार समय हाथ से निकल गया तो आप आईपीएस तो रहेंगे...नाम और दाम भी होंगे आपके पास...किन्तु जनता के दिलों में आपका कोई स्थान नहीं होगा। जहां जाएंगे वहाँ की जनता आपके तुरंत वापिस जाने की दुआ करेगी। निर्णय आपने करना है....हमारा काम तो लिखना है...मानो ना मानो आपकी मर्जी। आपका स्वभाव ये बताता है कि आपने इस लिखे पर गौर तो क्या करना है...लिखने वाले के प्रति मन में गांठ जरूर बांध लेनी है। अकील नूमामी की लाइन है....सिर्फ ले देके यही एक कमी है हममें,हम हर इक शख़्स को इंसान समझ लेते हैं।

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