Saturday, 23 May, 2009

बारूद के ढेर पर श्रीगंगानगर

श्रीगंगानगर! भारत पाक सीमा के निकट महाराजा गंगा सिंह द्वारा बसाया गया एक नगर। साम्प्रदायिक सदभाव की मिसाल श्रीगंगानगर। यहाँ के सदभाव को ना तो गुजरात के दंगे तोड़ सके ना पंजाब का आतंकवाद। जबकि श्रीगंगानगर पंजाब से केवल ५ कीमी दूर है। मगर अब कहानी कुछ कुछ बिगड़ने लगी है। एक चिंगारी शोला बन जाती है। गत दिवस ऐसा ही हुआ। नगर में आगजनी हुई,तोड़फोड़ हुई। कई घंटे लोग टेंशन में रहे। लेकिन इस बात की चिंता अधिकारियों को तो होने क्यों लगी। चिंता नगर वालों को होनी चाहिए, उनको भी नहीं है। अगर बॉर्डर वाले नगर में जिसके तीन तरफ़ सैनिक छावनियां और एक तरफ़ पाकिस्तान हो वहां तो अधिक से अधिक सावधानी बरतनी चाहिए, सभी पक्षों की ओर से। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह खतरनाक संकेत है इस नगर के लिए। अगर यही हाल रहा तो एक दिन सम्भव है ऐसा आए जब किसी के हाथ में कुछ नहीं होगा। जिसके हाथ में होगा वह बॉर्डर के उस पर बैठा हमारी नासमझी पर ठहाके लगा रहा होगा। बड़ी घटना की शुरुआत इसी प्रकार छोटी छोटी घटनाओं की रिहर्सल से ही तो होती है। अफसरों का क्या है श्रीगंगानगर नहीं तो और कहीं। मगर यहाँ के लोगों का क्या होगा? इसका जवाब किसी के पास नहीं हैं। यह कितना गंभीर मामला है लेकिन टीवी न्यूज़ चैनल्स वालों को इस प्रकार की ख़बर चाहिए ही नहीं। ये तो सब के सब सत्ता के आस पास रहे। । दिल्ली जयपुर के अख़बारों के लिए भी शायद यह कोई ख़बर नहीं थी। कितनी अचरज की बात है कि बॉर्डर पर बसे राजस्थान के इस श्रीगंगानगर के चिंता किसी को नहीं है। नारदमुनि तो केवल अपने प्रभु से प्रार्थना ही कर सकता है। पता नहीं प्रभु को भी समय है कि नहीं।

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