Thursday 8 July 2010

सरकार से भी बड़े डीएम

श्रीगंगानगर के डीएम आशुतोष एटी पेडणेकर राज्य सरकार के मंत्रियों,बड़े अफसरों से भी बहुत बड़े पद के हैं। इसी कारण उन्होंने अपने पास आने जाने वालों पर निगाह रखने के लिए पांच सीसीटीवी कैमरे लगा रखे हैं। इनकी नजर से बचना बहुत ही मुश्किल है। एक अफसर के लिए इतने कैमरे दिल्ली में भी नहीं होंगे। डीएम से मिलने के लिए छोटा सा वेटिंग रूम है। वहां दो कैमरे हैं। एक वहां बरामदे में है जहाँ से वोटिंग रूम में दाखिल होते हैं। एक बरामदे से बाहर। इसके अलावा एक कैमरा उनके निजी सचिव के कमरे के बाहर है। इतने सीसीटीवी कैमरे जयपुर में किसी मंत्री,अधिकारी के ऑफिस या घर में नहीं मिलेंगे। पता नहीं डीएम को किस से क्या डर है जो इतने कैमरे लगाने की जरुरत पड़ी। डीएम इस बारे में कुछ भी नहीं कहते।
एक बात और, नव दम्पति विवाह का पंजीयन करवाने के लिए डीएम [मैरीज रजिस्ट्रार ] के समक्ष पेश होते हैं। ये जोड़े वहां से कोई अच्छी याद अपने साथ लेकर नहीं जाते। पेडणेकर जी पहले तो उनको लम्बा इंतजार करवाते हैं। जोड़े इंतजार के दौरान वहां आने आने वालों की नज़रों से अपने आप को असहज महसूस करते हैं। बहरहाल, यागल जब उनके दरबार में पहुँचते हैं तो डीएम उनसे उनके नाम पता यूँ जैसे नव विवाहित दम्पति नहीं बंटी-बबली जैसे कोई शातिर मुजरिम हों। या शादी करके उन्होंने कोई गुनाह कर लिया हो। पहले तो इंतजार के कारण मूड ऑफ़ उस पर पुलिसिया स्टाइल की पूछताछ । कोई कुंवारा साथ हो तो शादी करने से तोबा कर ले। साहब जी हमारी सलाह मानो तो ऐसे दम्पतियों को स्नेह से कुर्सी पर बिठाओ,उनका मुहं मीठा करवाओ। मिठाई ना हो तो मिश्री इलायची चलेगी। उनको दूधो नहाओ, पूतो फलो का आशीर्वाद दो। फिर देखो। कहने को तो ये केवल बात है। आपके मुहं से निकलेगी तो उनके लिए सोगात हो जाएगी। वे बाहर आकर हर जगह आपके गीत गायेंगे। अपने बच्चों को आपके बारे में बताएँगे। उनका ही नहीं आपका सुना चेहरा भी खिल उठेगा। डीएम जी बड़े वही होते हैं जो बड़ा पन दीखते हैं। वरना तो बड़े दही में पड़े होते है।
" कहना है इतना कुछ, मगर कह नहीं सकते,फितरत है अपनी भी चुप रह नहीं सकते।"

1 comment:

सतीश सक्सेना said...

अपनत्व से आपकी तारीफ सुनकर आया हूँ !
http://satish-saxena.blogspot.com/2010/07/blog-post.html

पहले पैराग्राफ से लगा कि कैमरों पर ऊँगली क्यों उठा रहे हैं , इनका कारण तो वहां की परिस्थितियां होंगी जिसे कोई आगंतुक कैसे समझ पायेगा ?? और इनकी तुलना मिनिस्टर से करना बिलकुल उचित नहीं ! यह पैराग्राफ लगता है कि आपने डी एम के प्रति केवल आक्रोश उतारने के लिए लिखा है ! आशा है मेरी बात का बुरा नहीं मानेंगे !

दूसरे पैरा की शिकायत बिलकुल ठीक है, यहाँ पर अधिकारी को चाहिए कि नव विवाहित बच्चों को घर जैसा माहौल देते हुए उन्हें आशीर्वाद दें न कि अंतिम मुहर लगाते समय भी उन्हें प्रताड़ित करें ! इस लेख को शिकायत के रूप में सम्बंधित कमिश्नर को भिजवाइये और प्रतिलिपि डी एम साहब को अवश्य दें ! गलत बात के विरोध के लिए आपको मेरी शुभकामनायें !

शायद वे अपनी गलती महसूस करलें !