Monday 7 September 2009

भगवान भला करे आपका


पोस्ट में जो कुछ दिख रहा है वह अख़बार में छपी खबरों के हैडिंग हैं। इस से बहुत कुछ साफ साफ पता लग रहा है कि श्रीगंगानगर में हो क्या रहा है। यहाँ किसी के साथ कुछ भी हो सकता है। बस, आप अपराधी किस्म के नहीं होने चाहिए। यहाँ के डीवाईएसपी हैं विपिन शर्मा। इनका बड़ा भाई नगर का कोतवाल है। ये दोनों आजकल यहाँ के एस पी की आँख और कान हैं। यहाँ की जनता सब जानती है मगर सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस नेताओं की आंखों को ना कुछ दिखता है,ना कानों से ऐसी बात सुनती है। "राजस्थान पत्रिका" अखबार किसी बड़े के खिलाफ लिखने से परहेज रखता है। किन्तू चार में से तीन कटिंग पत्रिका की ही हैं। मतलब, वह भी मजबूर हो गया लिखने के लिए। कौनसा झूठ लिखा। सच बात लिखने में क्या हर्ज। यहाँ तो आप सभी से इतना ही कहना है कि अगर किसी की राजस्थान की राजधानी जयपुर तक अप्रोच हो तो वह ये जानकारी सरकार तक पहुँचा दे। जिस से सरकार को पता लग सके कि श्रीगंगानगर में हो क्या रहा है। अखबार तो अब पूरी तरह से लोकल हो चुके हैं। इस लिए यहाँ की बात जयपुर तक पहुंचती ही नहीं। आम आदमी तो पुलिस के खिलाफ बोल नहीं सकता।[ भगवान ध्यान रखना, कहीं मैं लपेटे में ले लिया जाऊँ।] नेताओं को पता ही है। वे चुप ही रहेंगें। क्योंकि पुलिस में जो अधिकारी आज यहाँ लगे हुए हैं वह सब उनकी सिफारिश से ही तो हैं।
पता नहीं इस नगर का क्या होगा? ऐसी दुर्गति भी होगी, कभी सोचा नहीं था। नारायण, नारायण।

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