Wednesday, 11 February 2009

चड्डी और साड़ी में घमासान

---- चुटकी----

वेलेंटाइन डे पर
चड्डी और साड़ी में
हो गया घमासान,
कोई जीते कोई हारे
दाव पर लगा दी
नारी की शान।

प्रेम के देश में प्रेम का आयात

हमारे महान हिंदुस्तान को पता नहीं क्या हो गया या कुछ सिरफिरे लोगों ने कर दिया कि सड़े गले,दुर्गन्ध वाले विदेशी रीति रिवाजों को अपने अन्दर समाहित करने में अपने आपको गौरवान्वित महसूस करता है। यहाँ बात करेंगें वेलेंटाइन डे की। जिस हिंदुस्तान में सदियों से प्रेम,प्रीत,स्नेह,लाड ,प्यार की नदियाँ बहती रहीं हैं वह यह डे प्रेम सिखाने आ गया। या यूँ कहें कि प्रेम के नाम पर गन्दगी फैलाने आ गया। हिंदुस्तान तो प्रीत का दरिया है। कौनसा ऐसा सम्बन्ध है जो प्रेम पर नहीं टिका हुआ। सोहनी-महिवाल को कोई भूल सका है क्या? राधा -कृष्ण की प्रीत की तो पूजा जाता है। मीरा की भक्ति भी तो प्रेम का ही एक रूप थी। सुदामा-कृष्ण,श्रीराम और बनवासी निषाद राज की मित्रता का प्रेम क्या प्रेम नहीं था। अर्जुन से प्रेम था तभी तो कृष्ण ने उसका सारथी बनना स्वीकार किया। लक्ष्मण-उर्मिला के प्यार को लिखने के लिए तो कोई शब्द ही नहीं है। श्रवण कुमार का अपने माता-पिता के प्रति प्यार तो इतिहास बना हुआ है। श्रीराम और सुग्रीव ने अपनी मित्रता के प्रेम को कैसे निभाया कौन नहीं जानता। भाई के प्रति भाई के प्रेम की कहानी तो रामचरितमानस के पन्ने पन्ने पर है। प्रेम तो वह है जिसका कोई आदि और अंत ही नहीं है।ये नाम तो वो हैं जो आम हिन्दुस्तानी जानता है। इसके अलावा भी ना जाने कितने ही नाम होंगें जो प्यार को अमर बनाकर चले गए। पता नहीं संस्कार वान हिन्दुस्तानियों ने अपने सास्वत सत्य प्रेम को छोड़कर झूठे,क्षणिक वेलेंटाइन मार्का प्यार को क्यों अपनाना शुरू कर दिया जो यह कहता है बस एक दिन प्रेम करो और उसको भी लड़कियों से जोड़ दिया। जबकि हिंदुस्तान में तो हर पल हर क्षण प्रेम, प्यार प्रीत की गंगा बहती है।पता नहीं यह आयातित प्रेम हमारे लड़के-लड़कियों को कहाँ लेकर जाएगा। एक दिन के प्रेम में शालीनता,गरिमा की तो उम्मीद ही नहीं की जा सकती। जबकि हिन्दुस्तानी प्रेम की तो नीवं ही गरिमा और शालीनता है। किसी ने कहा है--"ये कोई खेल नहीं है जिंदगी के जीने का, लगी है शर्त तो सिक्का उछल कर देखो"।

Tuesday, 10 February 2009

जाते जाते नई शुरुआत

श्रीगंगानगर के निवर्तमान एसपी आलोक विशिस्ट आज जाते जाते यहाँ एक नई शुरुआत कर गए। उन्होंने मीडिया कर्मियों को अनौपचारिक बातचीत के लिए बुलाया। उन्होंने जिस प्रकार से मीडिया को बुलाया था बात भी उसी प्रकार की , बिना लाग लपेट के। वे उस कुर्सी पर नहीं बैठे जो उनके लिए होती है। हालाँकि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने उनसे बार बार अपनी चेयर पर बैठने का आग्रह किया लेकिन वे नहीं माने। उन्होंने साफ कहा कि वे आज केवल अनौपचारिक बात चीत के लिए ही आयें हैं। श्री आलोक जी किसी की आलोचना से बचे, इलाके की जनता की सकारात्मक सोच की सराहना की। इसी बात चीत के दौरान नवनियुक्त एसपी उमेश चन्द्र दत्ता भी आ गये। एक घंटा तक विभिन्न मसलों पर बात चीत हुई। उन्होंने श्रीगंगानगर इलाके को बहुत अच्छा बताया। सभी मीडिया कर्मियों ने उनको गुड लक कहा। श्रीगंगानगर में ऐसा पहली बार हुआ जब निवर्तमान एसपी ने मीडिया कर्मियों को अनोपचारिक बात चीत के लिए बुलाया। कई साल पहले पत्रकार संगठन जाने वाले एसपी को विदाई पार्टी देकर नए एसपी का स्वागत किया करते थे।नए एसपी उमेश चन्द्र से भी इसी मूड में चर्चा हुई। उनसे पूछा गया कि क्या वे भी जिला कलेक्टर की तरह अपना मोबाइल फोन नम्बर जनता के लिए सार्वजानिक करना चाहेंगे? उन्होंने कहा कि वे पहले यहाँ के सिस्टम को समझ कर फ़िर इस बारे में कोई बात करेंगें। नए एसपी मूल रूप से चंडीगढ़ के रहने वालें हैं।

Monday, 9 February 2009

भिखारिन लगाती है भंडारा


आदमी थोड़ा देकर बहुत नाम कमाने की भावना दिल और दिमाग में रखता है। बहुत से ऐसे भी हैं जो सौ रुपल्ली का सामान अस्पताल में बाँट कर दो सौ रूपये उसके प्रचार में लगा देते हैं। मगर यह पोस्ट उनको समर्पित नहीं है। यह समर्पित है उस भिखारिन को जिसको भिखारिन कहना ही नही चाहिए। श्रीगंगानगर से प्रकाशित "प्रशांत ज्योति" दैनिक अखबार में एक ख़बर है। ख़बर यह बताती है कि एक भिखारिन ऐसे लोगों के लिए लंगर लगाती है जो असहाय है। इस भिखारिन के जज्बे को सलाम करते हुए यही कहना है कि हमें ऐसे लोगों से कुछ तो प्रेरणा लेनी ही चाहिए। "मजबूर" ने अपनी किताब "डुबकियां" में लिखा है---"कुछ देने से सब कुछ नहीं मिलता मजबूर,सब कुछ देने से कुछ मिलता है जरुर"। वे ये भी कहतें हैं--" हर जिंदगी है मुश्किल,हर जिंदगी है राज, मुझ से हजार होंगें,मुझ सी दास्ताँ नहीं"।

कैसे बनेगा काम जी

--- चुटकी----

पाक में जिन्ना
भारत में राम जी,
आडवानी जी का
पता नहीं
कैसे बनेगा काम जी।

Sunday, 8 February 2009

और क्या है जनाब

---- चुटकी----

पाक, तालिबान,
जेहाद और कसाब,
इसके सिवा
न्यूज़ चैनलों में
और
क्या है जनाब।

Friday, 6 February 2009

खूब मिले दाम

---- चुटकी----

क्रिकेट खिलाड़ियों के
खूब लगे दाम,
इतनी मंदी में भी
इतना महंगा
मिला सामान।

--गोविन्द गोयल

Wednesday, 4 February 2009

परदेसी बन भूल गया

दरवाजे पर खड़ी खड़ी

सजनी करे विचार

फाल्गुन कैसे गुजरेगा

जो नहीं आए भरतार।

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फाल्गुन में मादक लगे

जो ठंडी चले बयार

बाट जोहती सजनी के

मन में उमड़े प्यार।

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साजन का मुख देख लूँ

तो ठंडा हो उन्माद,

"बरसों" हो गए मिले हुए

रह रह आवे याद।

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प्रेम का ऐसा बाण लगा

रिस रिस आवे घाव

साजन मेरे परदेसी

बिखर गए सब चाव।

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हार श्रंगार सब छूट गए

मन में रही ना उमंग

दिल पर लगती चोट है

बंद करो ये चंग।

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परदेसी बन भूल गया

सौतन हो गई माया

पता नहीं कब आयेंगें

जर जर हो गई काया।

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माया बिना ना काम चले

ना प्रीत बिना संसार

जी करता है उड़ जाऊँ

छोड़ के ये घर बार।

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बेदर्दी बालम बड़ा

चिठ्ठी ना कोई तार

एस एम एस भी नहीं आया

कैसे निभेगा प्यार।

अकेली कहाँ है बावला

---- चुटकी----

चुनाव में कांग्रेस
अकेली कहाँ है बावला,
उसके साथ है
चुनाव आयुक्त चावला।

श्रीगंगानगर में किसान मेला आयोजित