"मुस्लिम भी हो सकता है प्रधानमंत्री। " ये इस देश के "युवराज" राहुल गाँधी ने कहा है। जो युवराज के मुहँ से निकल गया, उसे सच्च होने में कितना समय लगेगा। कुछ दिन बाद वे ये कहते हुए दिखें कि हिंदुस्तान अब इस्लामिक देश कहलायेगा। हो सकता है, क्यों नहीं हो सकता। यहाँ हिंदू जमात की तो कोई कद्र है ही नहीं। हर कोई मुस्लिम समाज को ही वोट बैंक के रूप में जानता,मानता और पहचानता है। इस समाज को अपने पल्लू से बांधने के लिए ये तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेता हिन्दुओं को कहीं भी धकेलने से गुरेज नहीं करेंगें। कभी आडवानी जी जिन्हा जी की शान में बोलते हैं। कभी कोई और नेता।
हे, मेरे देश के नेताओं इतना तो बता दो कि हिंदू इस देश में रह सकता है या नहीं। जिस प्रकार के हालत नेता पैदा कर रहें हैं उस से तो ऐसा लगता है कि जम्मू -कश्मीर की भांति हिंदुस्तान से भी हिन्दुओं के पलायन करने का समय आने वाला है। युवराज ने चेता दिया,आगे आपकी मर्जी।
आज हिन्दुओं की परवाह किसी को नहीं है। एक भी नेता,पार्टी उनकी वक्त,बेवक्त की मौत पर अपने "आंसू" नहीं बहाती। कोई दूसरी जात का मरे तो पूरी सरकार,उसके छोटे बड़े नेता शर्मिंदगी जताते हैं। उनके चरणों में बैठ कर "दया"[ वोट] की भीख मांगते हैं। कैसी विडम्बना है कि हिंदुस्तान में हिन्दुओं को ही धीरे धीरे दूसरे,तीसरे दर्जे का नागरिक बनाया जा रहा है। एक भी नेता,पार्टी उसके हक़ में नहीं है। कोई हक़ में आने के लिए कदम बढाता है तो उसको साम्पर्दायिक कह कर गाली दी जाती है। मुस्लिम हित की बात करने वाला यहाँ सच्चा-सुच्चा धर्मनिरपेक्ष बताया जाता है। सच में मेरा[पता नहीं है कि नहीं] भारत महान ।