हर इन्सान हर पल किसी ना किसी उधेड़बुन में रहता है। सफलता के लिए कई प्रकार के ताने बुनता है। इसी तरह उसकी जिन्दगी पूरी हो जाती हैं। उसके पास अपने लिए वक्त ही नहीं । बस अपने लिए थोड़ा सा समय निकाल लो और जिंदगी को केवल अपने और अपने लिए ही जीओ।
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सखियाँ खेलन को आई बन के सजना, मैं ना खेलूंगी तुम संग करो मोहे तंग ना। ---- साजन के रंग में रंगकर साजन की हो ली, तू तो हो गई री जोगन खेले ना होली। ---- घर घर धमाल मचाए सखियों की टोली, साजन परदेश बसा है कैसी ये होली।