Showing posts with label इधर उधर से संग्रहित. Show all posts
Showing posts with label इधर उधर से संग्रहित. Show all posts

Monday, 27 October 2008

इधर उधर से संग्रहित

इस नगर के लोग फिरते हैं मुखौटे ओढ़ कर,
सही लोगों को यहाँ खोजना mushkil है।
-----
जैसा bhee है इसमे नकली pan to नहीं
ये मेरा चेहरा है,बाबा तेरा क्या।
----
इश्क ना जाने bavla जाने इतनी बात
जो अपना सब यार का khaali अपने हाथ।
----
साहिब है अपनी जगह ma का अपना मान
फ़िर साहिब को janana pahle ma को जान।
----
kathputali हर shakhs है साँस है लम्बी डोर
khub nachakar वो hame khinche अपनी or।