Friday, 24 October, 2008

इधर उधर की कतरने

दुनिया में हर पल कुछ न कुछ लिखा जाता है। कोई ये कहे कि उसने सब पढ़ लिया तो समझो वह झूठा है। मैं इधर उधर से जहाँ भी मिलती है जानदार शानदार पंक्तियाँ नोट कर लेता हूँ। ऐसी ही कुछ लाइन यहाँ लिख रहा हूँ।
१-सारी दुनिया से दूर हो जाऊँ,
तेरी आंखों का नूर हो जाऊँ,
तेरी राधा बनू,बनू ना बनू
तेरी मीरा जरुर हो जाऊँ।
इस को सच्चे प्रेम की दास्ताँ ही कहेंगें कि कोई अपने प्यारे के लिए मीरा बनकर जहर का प्याला पीनेको तैयार है। अब इन लाइन को पढो और अहसास करो मिठास का।
२-धर्म का अर्थ धाम से पूछो
प्रेम का अर्थ श्याम से पूछो
कितने मीठे हैं बेर शबरी के
पूछना है तो श्रीराम से पूछो।
अब इन साहब की सुन लो क्या कहते हैं-
एक आदमी की बड़ी कदर है मेरे दिल में
भला तो वो भी नहीं मगर बुरा कम है।

1 comment:

Anonymous said...

सुन्दर!