हर इन्सान हर पल किसी ना किसी उधेड़बुन में रहता है। सफलता के लिए कई प्रकार के ताने बुनता है। इसी तरह उसकी जिन्दगी पूरी हो जाती हैं। उसके पास अपने लिए वक्त ही नहीं । बस अपने लिए थोड़ा सा समय निकाल लो और जिंदगी को केवल अपने और अपने लिए ही जीओ।
Monday, 5 July 2010
मां का आँचल
-------------- मां के आँचल में सोने का सुख अगली पीढ़ी नहीं ले पायेगी, क्योंकि जींस पहनने वाली मां आँचल कहाँ से लाएगी।
मेरे मित्र राजेश कुमार द्वारा भेजा गया एक एस एम एस।
5 comments:
ओह!!! विचारणीय .....
regards
आंचल नही ,क्रेच तो है ।
wah ekdam gager men sager.
wah gager men sager.
:-)
मगर वहां भी ममत्व यकीनन होगा !
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