ना जी, ऐसी बात नहीं है, हमारे पास जिला मुख्यालय पर एसपी से लेकर थानों में लांगरी तक है। प्रशासनिक अमले में पटवारी से डीएम तक,सब एक से बढ़कर एक। एसपी ऐसा जेंटलमैन कि जितनी तारीफ की जाये उतनी कम है। विनम्र,धार्मिक विचारों का सीधा -साधा एसपी। डीएम भी कमाल का मिला है हमारे जिले को। अपने सरकारी काम के अलावा बच्चों को उनके करियर के लिए गाइड करता है। कोई आम आदमी उसके दर पर आकर वापिस ना लौट जाये इसके लिए वे खुले में सबसे मिलते हैं, ऑफिस से बाहर, बरामदे में। फिर समस्या क्या है? समस्या सुमस्या कुछ नहीं है। इस इलाके के अनेक नेता कई सरकारों में मंत्री .......... । ये एसपी-डीएम के बीच मंत्री....... । टोका टाकी मत कर पहले पूरी बात सुन। जो नेता मंत्री हुए उन्होंने कभी सरकारी या प्राइवेट वाहन पर अपने मंत्रालय का नाम नहीं लिखवाया।
तो इसमें क्या बात है। ऐसा तो कोई किसी राज्य में नहीं करता। गलत, बिलकुल गलत। हमारे यहाँ तो कोई भी ऐसा कर सकता है। श्रीगंगानगर में कई प्राइवेट वाहन हैं जिस पर लाल प्लेट लगाकर मंत्रालयों के नाम लिखे हुए हैं। कई वाहनों पर लिखा है "इस्पात मंत्रालय", इस्पात मिनिस्टरी। कई बार तो इनमे से एक वाहन पर लाल बत्ती भी लगी होती है। दो कारों पर वित्त मंत्रालय लिखा हुआ है। ये दोनों कारें बैंक से सम्बंधित हैं। इनको कोई पुलिस वाला नहीं रोकता। मंत्री आने पर पुलिस को सूचना होती है। दोनों मंत्रालय केंद्र के हैं। हैरानी इस बात की है कि किसी ने इनको आज तक नहीं रोका,टोका। ये बोर्डर वाला जिला है। प्रेस लिखे वाहनों में कारोबारी माल ढोया जाता है। जिनका कपडे प्रेस करने का काम तक भी नहीं वे भी प्रेस लिखे वाहनों का प्रयोग करते हैं। पत्रकारों ने एक साथ इस बारे में एसपी को बताया था।
आधी रात के बाद सड़कों पर पुलिस की गश्त नहीं आवारा लड़कों की मटरगश्ती होती है। शराब के नशे में ये लोग हुड़दंग मचाते हैं। एसपी साहेब कोई शिकायत नहीं करेगा। किसकी हिम्मत है जो इनसे पंगा ले। छोटी छोटी चोरी वाले तो थानों तक पहुँचते ही नहीं। क्या होगा, कुछ भी तो नहीं।
डीएम ने अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस में कब्जों के खिलाफ कार्यवाही तुरंत करने की बात कही थी। उन्होंने अपनी बात पूरी की। सड़कों पर सुबह शाम लगने वाली फल सब्जी की रेहड़ियों को हटवा दिया। बेचारे गरीब लोग थे। सड़कों,सरकारी जमीन पर मकान दुकान बनाने का सिलसिला जारी है। हर इलाके में अंडर ग्राउंड बन रहे है। शहर को खोखला किया जा रहा है। प्रकृति ने एक झटका दिया तो नगर गुजरात बन जायेगा। मगर हम किसी को कुछ नहीं कहेंगे। इतने डीएम आये किसी ने किसी को कुछ नहीं कहा, हम क्यों कहें। यही हाल छोटे अफसरों का है। आम आदमी को झटके देने में कोई अफसर चूक नहीं करता। मिडिया में वाह वाही होती है। बड़े को सब सलाम बजाते हैं। क्योंकि इनकी बेगारें भी तो यही पूरी करते हैं। कोई रेहड़ी वाला किसी अफसर को क्या ओब्लाईज कर सकता है।
चलो बहुत हो गया। कल ही तो लंकापति के कुल को समाप्त कर राम राज्य की स्थापना की है। जब राम राज हो तो फिर किस को किस बात का डर। सब एक समान है। सब कोई सब काम करने को स्वतंत्र है। इसलिए एक कवि की दो लाइन पढो-" पुलिस पकड़ कर ले गई,सिर्फ उसी को साथ, आग बुझाने में जले जिसके दोनों हाथ।" एक एसएमएस -- भिखारी मंदिर के बाहर भीख मांगता है और सेठ मंदिर के अंदर।
हर इन्सान हर पल किसी ना किसी उधेड़बुन में रहता है। सफलता के लिए कई प्रकार के ताने बुनता है। इसी तरह उसकी जिन्दगी पूरी हो जाती हैं। उसके पास अपने लिए वक्त ही नहीं । बस अपने लिए थोड़ा सा समय निकाल लो और जिंदगी को केवल अपने और अपने लिए ही जीओ।
Monday, 18 October 2010
Sunday, 17 October 2010
दशहरा पूजन किया घर में

बुराई पर अच्छाई की जीत की ख़ुशी में हर साल आज के दिन दशहरा मनाया जाता है। इस दिन घर में इसकी पूजा अर्चना के बाद भोजन लेने की परम्परा है। सुबह गृहलक्ष्मी गाय के गोबर से दशहरे का प्रतीक मनाती है। उसके सामने दो टोकनी भी गोबर की बनाई जाती है। पूजा के बाद इनको दाल चावल का भोग अर्पित किया जाता है। दोनों टोकनी में भी दाल चावल भरे जाते हैं। शायद यह घर में अन्न के भंडार भरें रहे इस कामना से किया जाता है। हमने भी आज अभी दशहरा पूजन कर घर में सुख शांति,समृद्धि की प्रार्थना इश्वर से की।
राम राज को आयेंगे
---- चुटकी----
वो रावण
भी नहीं रहा,
ये भी
मारे जायेंगे,
तू उदास
मत हो
रे मना
राम राज
को आयेंगें।
वो रावण
भी नहीं रहा,
ये भी
मारे जायेंगे,
तू उदास
मत हो
रे मना
राम राज
को आयेंगें।
पत्रकार साथियों को शोक
श्रीगंगानगर से प्रकाशित दैनिक प्रशांत ज्योति के प्रधान संपादक श्री ओ पी बंसल की माता श्रीमती अंगूरी देवी का निधन हो गया। वे ८२ साल की थी।
श्रीगंगानगर के एक और पत्रकार श्री संजय सेठी की माता श्रीमती माया देवी का भी इसी रात को निधन हो गया। उनके परिवार ने उनकी मृत देह मेडिकल कॉलेज को दान कर दी।
हम दोनों आत्माओं को नमन कर परिवार को यह शोक सहन करने की प्रार्थना इश्वर से करते हैं। नारायण नारायण।
श्रीगंगानगर के एक और पत्रकार श्री संजय सेठी की माता श्रीमती माया देवी का भी इसी रात को निधन हो गया। उनके परिवार ने उनकी मृत देह मेडिकल कॉलेज को दान कर दी।
हम दोनों आत्माओं को नमन कर परिवार को यह शोक सहन करने की प्रार्थना इश्वर से करते हैं। नारायण नारायण।
Friday, 15 October 2010
अष्टमी पर माँ की आरती


श्रीगंगानगर के दुर्गा मंदिर में आज रात को अष्टमी के पर देवी दुर्गा की महाआरती की गई। एक साथ कई सौ बत्तियां प्रज्जवलित कर यह आरती हुई। मंदिर के कई दशकों पुराने पुजारी श्याम सुन्दर ने आरती की शुरुआत की। उसके बाद उसको उनके बेटे ऋषि कुमार ने संपन्न किया। आरती के समय बहुत बड़ी संख्या में धर्म परायण नर नारी,बच्चे मौजूद थे। दुर्गा मंदिर देवी माँ के जयकारों से गूंज रहा था। आरती के बाद प्रसाद का वितरण हुआ। अनेकानेक नर नारियों ने देवी माँ को चुनरी,सुहाग का सामान अर्पित किया।
Thursday, 14 October 2010
खबर के अन्दर खबर
ख़बरें वही नहीं होती जो हमारी नजरों को दिखाई दें। हालाँकि सब लोग खबर पढतें हैं, देखतें हैं और सुनते हैं। मगर बहुत सी खबरें बड़े बड़े लोगों के चेहरों, हाव-भाव और उनके अंदाज से भी निकल कर आती हैं। कई बार खबर के अन्दर भी खबर होती है। कुछ ऐसी ही खबरों का ज़िक्र आज यहाँ करने की कोशिश करते हैं।
----- राजस्थान में पंचायत विभाग को बहुत ही ताकतवर बना दिया गया है। पांच विभाग और उसके सुपुर्द हो गए हैं। जो विभाग पंचायत की झोली में डाले गए हैं उनके मंत्रियों का वजन कम होना स्वाभाविक है। शिक्षा मंत्री भंवर लाल मेघवाल की मनमर्जी सब जानते हैं। मुख्यमंत्री क्या उनके तबादलों के कारनामे तो प्रधानमंत्री तक पहुँच गए हैं। [ऐसा एक मंत्री ने मुझे बताया था।] कई मंत्री आपस में उलझे रहते हैं। मतलब की मंत्री परिषद् में सब ठीक नहीं कहा जा सकता। इसलिए इसमें फेरबदल होना संभव है। कब होगा इसके लिए कोई डेट निश्चित नहीं की जा सकती। इस प्रकार की "घटनाएँ" कभी भी हो सकती हैं। जिले के एक मात्र मंत्री गुरमीत सिंह कुनर बने रहेंगे। उनका विभाग बदल सकता है।वैसे वो बड़ा विभाग ना लेना चाहे तो अलग बात है। उनके पास अभी जो विभाग है वह असल में तो मार्केटिंग बोर्ड है। उसको मंत्रालय बना दिया गया है। उसमे से भी सड़कों का काम अब सार्वजनिक निर्माण विभाग को दे दिया जिस से वह और छोटा हो गया। चलो इंतजार करते हैं जादूगर के जादू का।
----- अभी कुछ दिन पहले अग्रवाल समाज की शोभायात्रा का आयोजन हुआ। श्रीगंगानगर के इतिहास में अग्रवाल समाज के लोग इतनी बड़ी संख्या में एक साथ कभी सड़कों पर नहीं आये। इस आयोजन के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर आरम्भ है। इस बात की चर्चा होना स्वाभाविक है कि विकास डब्ल्यू एस पी के बी डी अग्रवाल विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। उनकी सहानुभूति बीजेपी के साथ है। बताते हैं कि उनकी बीजेपी नेता वसुंधरा राजे सिंधिया से भी मुलाकात हुई है। श्री अग्रवाल श्रीमती राजे को श्रीगंगानगर लाने की योजना बना रहे हैं। अभी तक तो यहाँ के विधायक राधेश्याम गंगानगर को श्रीमती राजे के निकट माना जाता रहा है। अब ये नए समीकरण राधेश्याम की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। हालाँकि राधेश्याम गंगानगर इलाके के ऐसे राजनेता हैं जो कुछ भी कर सकने में संभव हैं। लेकिन संघ से उनकी पटरी नहीं बैठ रही। दूसरा सालों से वसुंधरा जी के आस पास रहने वाले नेता ये कब सहन करने लगे कि कल बीजेपी में आया राधेश्याम उनसे आगे निकल जाये। चुनाव में अभी तीन साल है। यहाँ की राजनीति कई रंग बदलेगी ऐसा आभास होने लगा है।
----- अग्रवाल समाज की शोभा यात्रा के समय विधायक राधेश्याम गंगानगर ने महाराजा अग्रसेन जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनको नमन किया। यह एक सामान्य बात है। जनप्रतिनिधि ऐसा करते ही हैं। अग्रवाल समाज के एक व्यक्ति, जो यहाँ अधिकारी हैं ने एतराज जताया। उन्होंने शोभा यात्रा के साथ चल रहे अग्रबंधुओं से कहा कि वे अरोड़ा समाज के राधेश्याम को उस वाहन पर मत चढ़ने दें जहाँ अग्रसेन महाराज की फोटो रखी है। यह अधिकारी वही हैं जो राधेश्याम के विधायक बनने बाद उनसे मिलने को आतुर था। अपने एक कर्मचारी की मार्फ़त जो सहायक के रूप में विधायक के साथ था। नरेश गोयल नामक इस अधिकारी ने अपनी एक किताब का विमोचन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से करवाया। हैरानी की बात ये कि उसी किताब का विमोचन उससे पहले इन्होने श्रीगंगानगर में एक समारोह में करवा लिया था।
----- राजस्थान में पंचायत विभाग को बहुत ही ताकतवर बना दिया गया है। पांच विभाग और उसके सुपुर्द हो गए हैं। जो विभाग पंचायत की झोली में डाले गए हैं उनके मंत्रियों का वजन कम होना स्वाभाविक है। शिक्षा मंत्री भंवर लाल मेघवाल की मनमर्जी सब जानते हैं। मुख्यमंत्री क्या उनके तबादलों के कारनामे तो प्रधानमंत्री तक पहुँच गए हैं। [ऐसा एक मंत्री ने मुझे बताया था।] कई मंत्री आपस में उलझे रहते हैं। मतलब की मंत्री परिषद् में सब ठीक नहीं कहा जा सकता। इसलिए इसमें फेरबदल होना संभव है। कब होगा इसके लिए कोई डेट निश्चित नहीं की जा सकती। इस प्रकार की "घटनाएँ" कभी भी हो सकती हैं। जिले के एक मात्र मंत्री गुरमीत सिंह कुनर बने रहेंगे। उनका विभाग बदल सकता है।वैसे वो बड़ा विभाग ना लेना चाहे तो अलग बात है। उनके पास अभी जो विभाग है वह असल में तो मार्केटिंग बोर्ड है। उसको मंत्रालय बना दिया गया है। उसमे से भी सड़कों का काम अब सार्वजनिक निर्माण विभाग को दे दिया जिस से वह और छोटा हो गया। चलो इंतजार करते हैं जादूगर के जादू का।
----- अभी कुछ दिन पहले अग्रवाल समाज की शोभायात्रा का आयोजन हुआ। श्रीगंगानगर के इतिहास में अग्रवाल समाज के लोग इतनी बड़ी संख्या में एक साथ कभी सड़कों पर नहीं आये। इस आयोजन के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर आरम्भ है। इस बात की चर्चा होना स्वाभाविक है कि विकास डब्ल्यू एस पी के बी डी अग्रवाल विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। उनकी सहानुभूति बीजेपी के साथ है। बताते हैं कि उनकी बीजेपी नेता वसुंधरा राजे सिंधिया से भी मुलाकात हुई है। श्री अग्रवाल श्रीमती राजे को श्रीगंगानगर लाने की योजना बना रहे हैं। अभी तक तो यहाँ के विधायक राधेश्याम गंगानगर को श्रीमती राजे के निकट माना जाता रहा है। अब ये नए समीकरण राधेश्याम की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। हालाँकि राधेश्याम गंगानगर इलाके के ऐसे राजनेता हैं जो कुछ भी कर सकने में संभव हैं। लेकिन संघ से उनकी पटरी नहीं बैठ रही। दूसरा सालों से वसुंधरा जी के आस पास रहने वाले नेता ये कब सहन करने लगे कि कल बीजेपी में आया राधेश्याम उनसे आगे निकल जाये। चुनाव में अभी तीन साल है। यहाँ की राजनीति कई रंग बदलेगी ऐसा आभास होने लगा है।
----- अग्रवाल समाज की शोभा यात्रा के समय विधायक राधेश्याम गंगानगर ने महाराजा अग्रसेन जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनको नमन किया। यह एक सामान्य बात है। जनप्रतिनिधि ऐसा करते ही हैं। अग्रवाल समाज के एक व्यक्ति, जो यहाँ अधिकारी हैं ने एतराज जताया। उन्होंने शोभा यात्रा के साथ चल रहे अग्रबंधुओं से कहा कि वे अरोड़ा समाज के राधेश्याम को उस वाहन पर मत चढ़ने दें जहाँ अग्रसेन महाराज की फोटो रखी है। यह अधिकारी वही हैं जो राधेश्याम के विधायक बनने बाद उनसे मिलने को आतुर था। अपने एक कर्मचारी की मार्फ़त जो सहायक के रूप में विधायक के साथ था। नरेश गोयल नामक इस अधिकारी ने अपनी एक किताब का विमोचन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से करवाया। हैरानी की बात ये कि उसी किताब का विमोचन उससे पहले इन्होने श्रीगंगानगर में एक समारोह में करवा लिया था।
Wednesday, 13 October 2010
Wednesday, 6 October 2010
अग्रवाल होंगे सम्मानित
अग्रवाल सेवा समिति ,श्रीगंगानगर
विशेष आग्रह व सूचना
राजस्थानवासी अग्रवाल समाज के सभी छात्र -छात्राओं को सूचित किया जाता है कि अग्रवाल सेवा समिति द्वारा राजस्थान के समस्त अग्रवाल समाज के विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए निम्नलिखित योजना है।
१-भारतीय प्रशासनिक सेवाओं आईएएस/आईपीएस तथा आईआरएस में वर्ष २०१० तथा इसके बाद के वर्षों में चयनित परीक्षार्थियों को समिति गोल्ड मैडल से सम्मानित करेगी।
२-राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं आरएएस/आरपीएस तथा आरजेएस में वर्ष २०१० में तथा इसके बाद के वर्षों में चयनित परीक्षार्थियों को समिति सिल्वर मैडल से सम्मानित करेगी।
३-अखिल भारतीय स्तर पर [ सीबीएसई/ एनसीईआरटी] तथा राजस्थान राज्य माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर द्वारा सैकेंडरी तथा सीनियर सैकेंडरी परीक्षा में प्रथम स्थान पाने वाले विद्यार्थी को समिति गोल्ड मैडल तथा दूसरा स्थान पाने वाले को सिल्वर मैडल दिया जायेगा।
४-अखिल भारतीय स्तर पर आईआईएम ,आईआईटी ,एआईआईएमएस ,सीपीएमटी तथा राजस्थान में राज्य स्तर पर पीएमटी की प्रवेश परीक्षा तथा सी ए फ़ाइनल परीक्षा में प्रथम स्थान पाने वाले परीक्षार्थियों को गोल्ड मैडल, दूसरा स्थान पाने वाले विद्यार्थी को सिल्वर मैडल दिया जायेगा।
५-पिछले दो साल में एमबीए ,सीए किये तथा कैम्पस भर्ती के इच्छुक विद्यार्थी जो बैंकों में सर्विस के इच्छुक हो को योग्यता के आधार पर सर्विस दिलवाने का प्रयास किया जायेगा। कृपया सभी पात्र अपना बायोडाटा ई मेल या डाक द्वारा निम्न पते पर भेजे।
बी डी अग्रवाल [मुख्य सरंक्षक ]
अग्रवाल सेवा समिति ,विकास दाल मिल परिसर
नई धान मंडी गेट नंबर २,
श्रीगंगानगर ३३५००१
फोन ०९४१३९३४६४४ , ई मेल- beedeeagarwal@gmail.com
निवेदक
बी डी अग्रवाल,प्रबंध निदेशक
विकास डब्ल्यू एस पी लिमिटेड
श्रीगंगानगर
-------------------------------------------------------------------------------------------------
विकास डब्ल्यू एस पी के प्रबंध निदेशक श्री बी डी अग्रवाल राजस्थान का तो पता नहीं श्रीगंगानगर में पहले ऐसे आदमी है जिन्होंने अपने समाज के प्रतिभाशाली बच्चों के लिए प्रोत्साहन योजना शुरू की है। कुछ दिन पहले इन्होने समिति के माध्यम से कई लाख रूपये की सहायता अग्रवाल समाज के उन विद्यार्थियों के लिए डी जो अपनी फीस जमा नहीं करवा पाए थे। श्री अग्रवाल ने कल प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि यह सब हमारे जाने के बाद भी चलता रहेगा, इस प्रकार की व्यवस्था की जा रही है।
विशेष आग्रह व सूचना
राजस्थानवासी अग्रवाल समाज के सभी छात्र -छात्राओं को सूचित किया जाता है कि अग्रवाल सेवा समिति द्वारा राजस्थान के समस्त अग्रवाल समाज के विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए निम्नलिखित योजना है।
१-भारतीय प्रशासनिक सेवाओं आईएएस/आईपीएस तथा आईआरएस में वर्ष २०१० तथा इसके बाद के वर्षों में चयनित परीक्षार्थियों को समिति गोल्ड मैडल से सम्मानित करेगी।
२-राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं आरएएस/आरपीएस तथा आरजेएस में वर्ष २०१० में तथा इसके बाद के वर्षों में चयनित परीक्षार्थियों को समिति सिल्वर मैडल से सम्मानित करेगी।
३-अखिल भारतीय स्तर पर [ सीबीएसई/ एनसीईआरटी] तथा राजस्थान राज्य माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर द्वारा सैकेंडरी तथा सीनियर सैकेंडरी परीक्षा में प्रथम स्थान पाने वाले विद्यार्थी को समिति गोल्ड मैडल तथा दूसरा स्थान पाने वाले को सिल्वर मैडल दिया जायेगा।
४-अखिल भारतीय स्तर पर आईआईएम ,आईआईटी ,एआईआईएमएस ,सीपीएमटी तथा राजस्थान में राज्य स्तर पर पीएमटी की प्रवेश परीक्षा तथा सी ए फ़ाइनल परीक्षा में प्रथम स्थान पाने वाले परीक्षार्थियों को गोल्ड मैडल, दूसरा स्थान पाने वाले विद्यार्थी को सिल्वर मैडल दिया जायेगा।
५-पिछले दो साल में एमबीए ,सीए किये तथा कैम्पस भर्ती के इच्छुक विद्यार्थी जो बैंकों में सर्विस के इच्छुक हो को योग्यता के आधार पर सर्विस दिलवाने का प्रयास किया जायेगा। कृपया सभी पात्र अपना बायोडाटा ई मेल या डाक द्वारा निम्न पते पर भेजे।
बी डी अग्रवाल [मुख्य सरंक्षक ]
अग्रवाल सेवा समिति ,विकास दाल मिल परिसर
नई धान मंडी गेट नंबर २,
श्रीगंगानगर ३३५००१
फोन ०९४१३९३४६४४ , ई मेल- beedeeagarwal@gmail.com
निवेदक
बी डी अग्रवाल,प्रबंध निदेशक
विकास डब्ल्यू एस पी लिमिटेड
श्रीगंगानगर
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विकास डब्ल्यू एस पी के प्रबंध निदेशक श्री बी डी अग्रवाल राजस्थान का तो पता नहीं श्रीगंगानगर में पहले ऐसे आदमी है जिन्होंने अपने समाज के प्रतिभाशाली बच्चों के लिए प्रोत्साहन योजना शुरू की है। कुछ दिन पहले इन्होने समिति के माध्यम से कई लाख रूपये की सहायता अग्रवाल समाज के उन विद्यार्थियों के लिए डी जो अपनी फीस जमा नहीं करवा पाए थे। श्री अग्रवाल ने कल प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि यह सब हमारे जाने के बाद भी चलता रहेगा, इस प्रकार की व्यवस्था की जा रही है।
Tuesday, 5 October 2010
बेचारे मास्टर जी
मास्टर/मास्टरनी को किसी ज़माने में बेचारा कहा जाता था। तब से अब तक नहरों में बहुत पानी बह गया। अब मास्टर/मास्टरनी बेचारे नहीं रहे। बढ़िया तनख्वाह है। अच्छा घर चलता है। खुद सरकारी हैं लेकिन बच्चे निजी स्कूल्स में पढ़ते हैं। क्योंकि वहां व्यवस्था ठीक नहीं रहती। जब मास्टर जी अपने लाडलों को इन स्कूलों में नहीं पढ़ाएंगे तो कोई और क्यों ये रिस्क ले। लिहाजा सरकारी स्कूल्स में मास्टर/मास्टरनी को पढ़ाने के अलावा और काम करने का खूब समय मिल जाता है। अब कुछ मुश्किल होने लगा है। मास्टरजी को सत्तारूढ़ पार्टी के छोटे बढे नेताओं की चौखट पर हाजिरी देनी पड़ती है। किसी समय इनके तबादलों से नेताओं का कोई लेना देना नहीं था। अब तो विधायक या विधानसभा का चुनाव हुए नेता के परवाने के बिना तबादला नहीं होता। जिन मास्टर/ मास्टरनियों की राजनीतिक गलियारों में पहुँच थी उन्होंने अपने तबादले अपनों मनपसंद जगह करवा लिए। बाकियों को फंसा दिया। ऐसे लोग राजनीतिज्ञों के यहाँ धोक लगा रहे हैं। किसी की धोक सफल रहती है किसी की नहीं। चढ़ावे के बिना तो कोई मन्नत पूरी ही नहीं होती। राजनीति की दखल जितनी शिक्षा में है उतनी तो किसी में भी नहीं है। प्रदेश में हजारों हजार मास्टर/मास्टरनी है। इतना चढ़ावा है कि गिनती करने के लिए मशीन लगानी पड़े। नीचे से ऊपर तक सब जानते हैं। कहाँ कहाँ कौन कौन ये सब करवा रहा है, ना तो सरकार की नजर से छिपा है न अधिकारिओं की आँखों से। लेकिन होगा कुछ नहीं। जिसकी अप्रोच है वह मजे में है। जिसको तबादल के रास्ते पता है, उसको कोई टेंशन नहीं है। बाकी सब निराश होकर ऐसे बन्दों की तलाश कर रहे है जो उनका काम करवा सके, दाम लेकर। राजस्थान सरकार का एक मंत्री खुद कहता है कि पैसे देकर करवा लो मेरे बसकी बात नहीं है। इस से अधिक लिखना कोई मायने नहीं रखता। तबादले शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए नहीं होते। ये तो कमाई का जरिया है। जो मास्टर/मास्टरनी एक से दो घंटे का सफ़र करके अपने स्कूल में पहुंचेगा वह क्या तो पढ़ा पायेगा क्या देश की शिक्षा के बारे में चिंतन मनन करेगा। ऐसा तो है नहीं की जिसको जिस गाँव में लगाया है वह वहीँ रहेगा। पता नहीं सरकार कब इन मास्टर/मास्टरनियों को अपने नेताओं के चंगुल से मुक्त करेगी।
Saturday, 2 October 2010
तुझे पराई क्या पड़ी
मसला तो हिन्दूस्तान का है और पेट में दर्द हो रहा है पाकिस्तान के। इस बारे में तो यही कहना ठीक रहेगा।
ओरों के घर
के झगड़े
ए रावण
ना छेड़ तू,
तुझे पराई
क्या पड़ी
अपनी
नीबेड़ तू।
ओरों के घर
के झगड़े
ए रावण
ना छेड़ तू,
तुझे पराई
क्या पड़ी
अपनी
नीबेड़ तू।
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